शैक्षिक कार्यो में इंटरनेट की भूमिका : एक अध्ययन

आशुतोष कुमार*
डा. रचना गंगवार**

प्राचीनकाल में भारत के नालंदा और तक्षशिला आदि विश्वविधालय संपूर्ण संसार में शिक्षा के उच्च केन्द्र थे। प्राचीनकाल में पहले मौखिक एवं कंठस्थ रूप में शिक्षा प्रचलित थी । समय के साथ शिक्षा का स्वरूप और इसके तौर तरीकों में बदलाव आया। इसके बाद में धीरे-धीरे शिक्षा उपकरणों के रूप में लिखित शब्दों का उपयोग होने लगा। यह दूसरी क्रान्ति थी। जिसके फलस्वरूप स्कूलों में मौखिक शिक्षा के साथ लिखित शिक्षा ने भी स्थान ले लिया। इसके फलस्वरूप शिक्षा को अध्ययन हेतु घरो की दीवारों पेड़ो के पत्तों, गुफाओं की दीवारों पर संकेतो के द्वारा लिखित रूप में दर्शाया जाने लगा ंथा। तीसरी क्रान्ति मुद्रण के अविष्कार के साथ आयी तथा पुस्तकें उपलब्ध होने लगी। इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीकी क्षेत्र में आये विकासशील परिवर्तन चौथी क्रान्ति के सूचक थे। इसके बाद रेडियो तथा टेलीविजन आदि का प्रयोग शिक्षा के क्षेत्र में होने लगा। कम्प्यूटर, लैपटॉप, टेबलेट, मोबाइल, स्मार्ट फोन एवं सीडी-डीवीडी आदि के आने से संचार के क्षेत्र में विकास हुआ जिससे कि ईमेल, डिजिटल वीडियो, ई-बुक्स, ई-शिक्षा, ऑनलाइन शिक्षा और इंटरनेट के माध्यम से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इन यंत्रों ने नई क्रान्ति का उदय किया। इन साधनों ने शिक्षा के क्षेत्र में पुरानी अवधारणाओं में आधुनिक सन्दर्भ के साथ अभूतपूर्व क्रान्तिकारी परिवर्तन करके उन्हें एक नया स्वरूप प्रदान किया है।

जब उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एरिक एशबी ने 1967 में चार क्रान्तियों का उल्लेख किया तो उन्हें इस बात का आभास भी नहीं होगा कि चौथी क्रान्ति शैक्षिक क्षेत्र में पाँचवीं क्रान्ति को जन्म देगी जिसके परिणामस्वरूप संसार की लगभग सारी शिक्षा व्यवस्था का ब्यौरा अर्थात शिक्षा दर्शन, शिक्षा की विषय-वस्तु, पाठ्यक्रम शोध-पत्र, पत्र-पत्रिकाएँ, ई-बुक्स, ई-लाईब्रेरी अािद एक डिब्बे में बन्द हो सकेगा और संसार का कोई भी व्यक्ति अथवा विद्यार्थी कहीं भी किसी भी एक कोने में बैठकर ऑनलाइन अध्ययन के द्वारा बड़ी से बड़ी उच्च शिक्षा की डिग्री प्राप्त कर सकेगा। उस समय ऐसी बातों को लोग मजाक समझते थे और यकीन नहीं करते थे, लेकिन आज सूचना और संचार प्रौद्योगिकी ने यह साबित कर दिया हैं।

हाल में हुए एक अध्ययन के अनुसार आज के विद्यार्थी कालेज और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों से केवल एक तिहाई शिक्षा अपने सहपाठी समूह से और बाकी स्व-अध्ययन के द्वारा सीखते हैं। सिर्फ विश्वविद्यालय ही सीखने के स्रोत नहीं रहे हैं, न ही वे सभी को आजीवन शिक्षा के आधार पर उच्च शिक्षा, तकनीकी दक्षता और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करने की जिम्मेदारी उठा सकते हैं। आज मल्टीमीडिया और इंटरनेट के प्रयोग ने एक नए युग की शुरुआत कर दी है, जिसने विद्यार्थियों और शिक्षकों में उम्मीदे जगा दी हैं।

नई तकनीक मशीने एवं इंटरनेट सीखने वालों को लचीलापन प्रदान करती हैं। चूँकि ये सीखने वालों की सभी इन्द्रियों को एक साथ परस्पर संबंधित करती हैं, इसलिए सीखना दिलचस्प हो जाता है। इन मशीनी इकाइयों द्वारा शिक्षा को मनोरंजन के साथ मिश्रित करना भी आसान हो जाता है। इस प्रकार यह शिक्षा आधारित मनोरंजन बन जाता है। ये काफी प्रोत्साहन देने वाले होते हैं और सीखने वालों को ‘शक्ति’ और ‘सत्ता’ प्रदान करते है। इस प्रकार सूचना के इस युग में शिक्षा और सीख के लिए नई तकनीकों का अधिक दिलचस्प और कारगर ढ़ंग से प्रयोग करना संभव हो गया हैं।

इंटरनेट दैनिक जीवन में परिवर्तन का माध्यम बन गया है। रिचर हुकर ने चेतावनी दी थी कि परिवर्तन असुविधाजनक ही होता है। इंटरनेट एक सूचना का बहुत बड़ा भण्डार है जिसने संसार की जानकारियों को एक जगह उपलब्ध करा कर एक अदभुत कार्य किया है। यह सभी विषयों पर सूचना उपलब्ध कराता है और संसार भर में कहीं भी इसे एक्सेस (ड्डष्ष्द्गह्यह्य) किया जा सकता है। इंटरनेट ने आज विद्यार्थियों को अपनी मर्जी, अपने समय और अपने स्थान के अनुसार अपने अध्ययन को आगे बढ़ाने का विकल्प दिया है। विद्यार्थी पाठ्य-सामग्री तक पलक झपकते पहुँच जाते हैं। इसमें विद्यार्थियों की सीधी पहुँच होती हैं और वे अध्ययन तथा सीखने के बजाये खोज करने से सीखते हैं। इस प्रकार सीखने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत अधिक विद्यार्थी केन्द्रित बन जाती है। ज्यादातर कार्यक्रम विद्यार्थियों को सूचना के नए क्षेत्रों की खोज के लिए इन्टरनेट पर कुशल बनाते हैं। खोज की यह प्रक्रिया विद्यार्थियों को खोज और नई-नई सूचनाओं को जानने के लिए प्रेरित करती है।

आज इंटरनेट का उपयोग जीवन के सभी क्षेत्रों में बढ़ता ही जा रहा है, जिससे इंटरनेट का विस्तार पूरी दुनिया में तेजी से होता जा रहा है। सरकारी, गैर-सरकारी, स्वास्थ्य, बैकिंग, खेल, समाचार के साथ प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा में इंटरनेट अपनी भूमिका को निभा रहा है। इंटरनेट के उपयोग ने विद्यार्थियों के सामने आज उच्च शिक्षा हेतु राह आसान की है। ‘आज न केवल उच्च शिक्षा संस्थानो बल्कि माध्यमिक व प्राइमरी स्कूलों के विद्यार्थियों की भी इंटरनेट से पढ़ाई करने में विशेष रुचि है’। इंटरनेट के प्रसार के बाद भारत में सूचना और संचार के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन हुए है। भरत में इंटरनेट सेवाओं के उपभोक्ता अपना ज्ञान बढ़ाने के लिए सभी प्रकार के सूचना स्रोतों तक पहुँच सकते हैं। विकासशील देशों में भारत की गणना उन देशों में होती है, जहाँ इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या सबसे अधिक है। भारत में इंटरनेट के प्रसार की सहायता एवं समर्थन मिलने के दो प्रमुख कारण हैं, इनमें प्रथम है जो अंग्रेजी जानते और समझते हैं तथा जो किसी अन्य भाषा की अपेक्षा अंग्रेजी में संचार को प्राथमिकता देते हैं। आँकड़ों से पता चलता है कि जनवरी 1997 में भारत के करीब 3,138 इंटरनेट होस्ट थे, जो उससे पिछले वर्ष के मुकाबले 298 प्रतिशत अधिक थे। इसे शैक्षिक अनुसंधान नेटवर्क (एर्नेट) द्वारा केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा था। यह सेवा देश में इंटरनेट ढ़ाँचा कायम करने और भारतीय इंटरनेट सेवा को अंतरराष्ट्रीय पहुँच में लाने की दिशा में भारत और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम का पहला संयुक्त प्रयास था।

नवें दशक के मध्य भारत में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यापक क्रान्ति हुई है, जिसने भारत को अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी पंक्ति में पहुँचा दिया हैं। देश में सूचना प्रौद्योगिकी की पहचान एक ऐसे एजेंट के रूप में हुई है जो मानव जीवन के सभी क्षेत्रों के सभी पहलुओं में परिवर्तन लाने वाला है और जिसने 21वीं शताब्दी में ज्ञान पर आधारित समाज का निर्माण किया।

आज पूरी दुनिया में इंटरनेट का उपयोग हो रहा हैं, भले ही कुछ देशों में यह प्रयोग कम है और कुछ में ज्यादा। भारत की 8 प्रतिशत से कम आबादी इंटरनेट का उपयोग करती हैं। अगर भाषा के आधार में देखा जाये तो इंटरनेट का उपयोग अंग्रेजी भाषा अपना प्रथम स्थान रखती हैं, जिसकी संख्या 56, 50, 04, 126 है। इसके बाद दूसरा स्थान चीनी भाषा का आता है।

शिक्षा के क्षेत्र में इंटरनेट

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इंटरनेट का बहुतायत से उपयोग किया जा रहा है। इसकी सहायता से शैक्षिक स्तर पर उन्नति हुई है। आज दुनिया के किसी भी कोने में बैठा विद्यार्थी इसकी सहायता से उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकता है। ई-शिक्षा (ई-लर्निंग) को सभी प्रकार इलेक्ट्रॉनिक समर्थित शिक्षा और अध्ययन के रूप में परिभाषित किया जाता है, जो विद्यार्थियों के व्यक्तिगत अनुभव, अभ्यास और ज्ञान के संदर्भ में ज्ञान के निर्माण को प्रभावित करता है। ई-शिक्षा में वेब-अधारित शिक्षा, कम्प्यूटर आधारित शिक्षा, आभासी कक्षाएँँ और डिजिटल सहयोग शामिल है। पाठ्य-सामग्रियों का वितरण इंटरनेट, इंटरानेट, एक्सट्रानेट, ऑडियो-वीडियो टेप, उपग्रह टीवी और सीडी रोम के माध्यम से किया जाता है। आज कल इंटरनेट का प्रयोग न केवल ई-शिक्षा में ही किया जा रहा हैं, बल्कि ऑनलाइन फॉर्म भरने, नौकरी के लिए आवेदन करने और पुस्तके पढऩे में भी किया जा रहा हैं। आज विद्यार्थी शिक्षा के सभी क्षेत्रों में इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं।

उच्च शिक्षा में आधुनिक शिक्षण मशीनों का उपयोग

आज शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक शिक्षण मशीनों मोबाइल, स्मार्ट फोन, लैपटॉप, टेबलेट, रेडियो, टेपरिकॉर्डर, ग्रामोफोन, टेलीविजन, प्रोजेक्टर, भाषा प्रायोगशाला आदि द्वारा शिक्षण आदि के प्रयोगों ने उच्च शिक्षा प्रक्रिया का मशीनीकरण कर दिया है। आज मशीनों के प्रयोग से शिक्षक अपने विद्यार्थियों कों आसानी से अपने ज्ञान कौशल से लाभान्वित करा सकता है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षण मशीनों का उपयोग आज तेजी से बढ़ता जा रहा है।

ऑनलाइन पुस्तके पढऩा

विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा हेतु अनेक पुस्तकों की आवश्यता होती है, जिन्हे खरीद पाना सबके लिए सम्भव नहीं है। इसके अलावा पुस्तकें महंगी और आसानी से उपलब्ध न होने के कारण विद्यार्थी ऑनलाइन पढऩा पसंद करते हैं। अत: ऑनलाइन पुस्तकों की उपलब्धता इन सभी विद्यार्थियों को लाभान्वित करती है। आजकल सभी प्रकार की पुस्तकों का विस्तारपूर्वक विवरण इंटरनेट पर उपलब्ध रहता है, जिससे ऑनलाइन बुक्स रीडिंग का अधिक प्रचलन हो गया है। विद्यार्थी अपनी पूरी पढ़ाई इन पुस्तकों का उपयोग करके कर लेते हैं।

ऑनलाइन पढ़ाई

यदि आप किसी व्यवसाय में रहते हुए अपनी शिक्षा जारी रखना चाहते है या आपके पास कक्षा में जाने का समय नहीं है, तो इसके लिए विद्यार्थी दूरस्थ शिक्षा के लिए सम्बन्धित संस्थान में विद्यार्थी ऑनलाइन घर या ऑफिस में बैठे-बैठे अपना अध्ययन जारी रख सकते है। ऑनलाइन परीक्षा भी दे सकते है। इससे उच्च शिक्षा की ओंर विद्यार्थियों का रुझान तेजी से बढ़ा रहा है।

दूरवर्ती शिक्षा

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आज दूरवर्ती शिक्षा प्रणाली का योगदान बढ़ता ही जा रहा है। दूरवर्ती शिक्षा प्रणाली में मल्टीमीडिया एवं इंटरनेट का योगदान अत्यधिक है। बहुत से व्यक्ति पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक और समय न होने के कारण, उच्च शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते हैं, लेकिन उनके मन में पढऩे की आकांक्षा बनी रहती है। इस प्रणाली के जरिए इच्छुक विद्यार्थी को उनके घरों पर ही शिक्षा मुहैया कराई जाती है। इस कार्य में मल्टीमीडिया, ऑडियो-वीडियो कैसेट, सीडी-डीवीडी, टेपरिकार्डर, वीडियो रिकार्डर, रेडियो, सामुदायिक रेडियो, टेलीविजन, ई-मेल, इंटरनेट, एस.एम.एस. एम.एम.एस., वीडियो पत्रिकाएं, टेलीविजन पत्रिकाएं, ज्ञानदर्शन चैनल आदि की मदद ली जाती है। इसमें शैक्षिक गतिविधियों जैसे-प्रवेश, पाठ्य-सामग्री घर बैठे विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एवं इंटरनेट के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है।

उच्च शिक्षा में टेलीकांफ्रेसिंग

इसका चलन अमेरिका में टेलीविजन तथा टेलीफोन पिक्चर फोन के जरिए 1960 में आरंभ हुआ। कांफ्रेसिंग हेतु कम्प्यूटर व इंटरनेट द्वारा प्रदत्त बहु-माध्यमी सेवाओं का उपयोग किया जाता है। यहाँ हम इंटरनेट सेवाओं द्वारा लिखित सामग्री, रेखाचित्रों आदि को कॉफ्रेसिंग में भाग लेने वाले व्यक्तियों को प्रेषित कर सकते हैं। ऑडियो-वीडियो कॉफ्रेसिंग, जब कम्प्यूटर टेक्नोलॉजी और इंटरनेट से अच्छी तरहा जुड़ जाती हैं, तो ऐसी टेलीकांफ्रेसिंग शिक्षक और विद्यार्थी दोनों को ही अपनी-अपनी स्वाभाविक रुचियों, समय और साधनों की उपलब्धता तथा सीखने-सीखाने की गति के आधार पर स्व-अनुदेशक एवं स्व-प्रशिक्षण प्रदान करती है। इससे विद्यार्थी उच्च शिक्षा के विषय में आपस में संवाद कर सकते हैं। इसके साथ ही आपस में पाठ्य-सामग्री के विषय में संवाद कर सकते हैं।

एम-लर्निंग

आजकल मोबाइल लर्निंग (एम-लर्निंग) का भी चलन है। आज मोबाइल विद्यार्थियों के साथ 24 घंटे उपलब्ध रहता है, जिससे वह इंटरनेट से हमेशा कनेक्ट रहते हैं। परिणामस्वरूप आज विद्यार्थी मोबाइल सर्विसेज की अति आधुनिक तकनीक का उपयोग ई-बैकिंग, ई-कामर्स तथा ई-लर्निंग में उसी तरह कर सकते हैं जैसे कि कंम्प्यूटरों द्वारा सुलभ इंटरनेट तथा वेब टेक्नोलॉजी द्वारा करते हैं। इस प्रकार से ई-लर्निंग का विगत या भूत है, तो दूसरा मोबाइल लर्निंग भविष्य है। नौलेज कोशेंट एजूकेशन के डाइरेक्टर भूमा कृष्णन (2007) ने ई-लर्निंग की ऐतिहासिक विवेचना करते हुए जो निष्कर्ष सामने रखे हैं, उनके अनुसार ई-लर्निंग कर विकास जिन चार प्रमुख अवस्थाओं में से गुजरा है, वे हैं (1) मल्टीमीडिया काल (1984-1993), (2) वेब-प्रारंभिक काल (1994-1999), (3) वेब तकनीक का नया दौर (2000- 2005) तथा वर्तमान समय में उपलब्ध मोबाइल लर्निंग।

ऑनलाइन प्रलेख वितरण सेवाएँ

वेबसाइट पर ऑनलाइन प्रलेख वितरण सेवाएं विश्व व्यापी रूप से उपलब्ध हैं। इन सेवाओं की सहायता से शोध आलेखों एवं अन्य प्रलेखों की छायाप्रति प्राप्त की जा सकती है।

ई-बुकशॉप

आज इन्टरनेट पर ऑनलाइन बुकशॉप उपलब्ध हैं। जिन पर विद्यार्थी अपनी रुचि के प्रलेखों को खोज सकते हैं। उसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है और उन्हे खरीद सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को पाठ्य-सामग्री के चयन में समय की बचत और आसानी से होती है।

प्रकाशन में इंटरनेट या ऑनलाइन प्रकाशन

आज सभी प्रकार के प्रमुख प्रकाशकों के होम पेज हैं एवं इन्टरनेट पर इनके द्वारा प्रकाशित पाठ्य-सामग्री से सम्बन्धित पूरी जानकारी उपलब्ध है। इसके साथ प्रकाशकों की किताबों को विद्यार्थी ऑनलाइन खरीद सकते हैं। शोध विद्यार्थियों के लिए यह बहुत उपयोगी है।

ई- प्रकाशन

आज जीवन के सभी क्षेत्रों में इंटरनेट ने अपनी पहुँच को आसान किया है। जिससे कि आज इंटरनेट पर किताबों की उपलब्धता में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। जिससे इंटरनेट पर किताबें तथा पत्र-पत्रिकाएँ प्रकाशित करना या उपलब्ध कराना ई-प्रकाशन कहलाता है और इस तरहा की पुस्तकें ई-बुक्स कहलाती हैं। जिसकों विद्यार्थी मुफ्त में या शुल्क अदा कर पढ़ सकता है। जिसकों आवश्यकतानुसार डाउनलोड भी किया जा सकता है। दिनों-दिन ई-बुक्स की अधिकता से यह सिद्ध होता है कि विधार्थियों की रुचि इस ओर बढ़ती जा रही है।

डिजिटल पुस्तकालय

आधुनिक समय में उच्च शिक्षा का स्तर तेजी से बदल रहा है। आज इंटरनेट ने विद्यार्थी को कभी-भी, कहीं भी सूचना एवं शिक्षा को आसान बना दिया है। विद्यार्थी एक क्लिक पर अपने विषय से सम्बन्धित हजारों जानकारी तक पहुँच सकता है। इंटरनेट ने दुनिया की किसी-भी जानकारी तक पहुँच आसान की है। इसमें दुनियाँ की किताबों, शोध-पत्रों ऑनलाइन लाइब्रेरी शोध-ग्रन्थों का अध्ययन विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार कर सकते है। एक अच्छी लाइब्रेरी में एक कैटलॉग होता है। जिससे पता चल जाता है कि लाइब्रेरी में कौन से डाक्यूमेंट उपलब्ध है और वह किस रैक में हैं।

शोध-प्रविधि

प्रस्तुत शोध पत्र में आंकड़ो के संकलन के लिए सर्वे पद्धति का उपयोग किया गया है। उद्देश्यपूर्ण निदर्शन प्रणाली के आधार पर 100 विद्यार्थियों (उत्तरदाताओं) से जानकारी प्राप्त की गयी है। ये विद्यार्थी लखनऊ शहर के विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

आकड़ों का सारणीयन तथा आरेखीय प्रस्तुतिकरण एवं विवेचना :

प्रश्न संख्या 1 : आप शैक्षिक कार्यों के लिए निम्न में से किसका उपयोग ज्यादा करते है –

1. इंटरनेट 9%
2. पाठ्य-पुस्तकें 4%
3. दोनों 87%

प्रश्न संख्या 1 सें स्पष्ट है कि जब उत्तरदाताओं से यह प्रश्न किया गया कि क्या आप शैक्षिक कार्यो के लिए निम्न में से किस माध्यम का उपयोग करते है। तो 9% उत्तरदाताओं ने कहाँ कि इंटरनेट का उपयोग करते है 4% उत्तरदाताओं ने कहाँ कि हम पाठ्य-पुस्तकों का उपयोग करते हैं व 87% उत्तरदाताओं ने कहाँ कि हम इंटरनेट और पाठ्य-पुस्तकों दोनों माध्यमों का उपयोग करते है।

प्रश्न संख्या 2 : आप पाठ्य-पुस्तकों तथा इंटरनेट में से शैक्षिक कार्यों के लिए किसका उपयोग ज्यादा करते हैं –

1. पाठ्य-पुस्तकें 61%
2. इंटरनेट 39%

प्रश्न संख्या 2 में उत्तरदाताओं से यह भी प्रश्न पूछा गया कि आप पाठ्य-पुस्तकों तथा इंटरनेट में से शैक्षिक कार्यों के लिए किसका उपयोग ज्यादा करते है। तो 61% उत्तरदाताओं ने कहाँ कि पाठ्य-पुस्तकों का उपयोग करते हैं व 39% उत्तरदाताओं ने कहाँ कि इंटरनेट का उपयोग करते हैं।

प्रश्न संख्या 3 : शैक्षिक कार्यों के लिए आप इंटरनेट का उपयोग क्यों करते हैं –

1. सस्ता-माध्यम 19%
2. पाठ्य-सामग्री की अधिक उपलब्धता 31%
3. मुफ्त में किताबों की उपलब्धता 9%
4. आसानी से किताबें उपलब्ध न होना 20%
5. किताबों का महंगी होना 14%
6. अन्य 7%

प्रश्न संख्या 3 में यह पूछा गया कि आप शैक्षिक कार्यों के लिए आप इंटरनेट का उपयोग क्यों करते हैं, तो 19% ने कहाँ कि सस्ता-माध्यम, 31% ने कहाँ कि पाठ्य-सामग्री की अधिक उपलब्धता, 9% ने कहाँ कि मुफ्त में किताबों की उपलब्धताए 20% ने कहाँ कि आसानी से किताबें उपलब्ध न होना, 14% ने कहाँ कि किताबों का महंगी होना व 7% ने अन्य कारण बतायें।

प्रश्न संख्या 4 : क्या इंटरनेट ने उच्च शिक्षा को आसान बनाया है –

1. हाँ 100%
2. नहीं 0%

प्रश्न संख्या 4 में उत्तरदाताओं से यह पूछा गया कि क्या इंटरनेट ने उच्च शिक्षा को आसान बनाया है, तो 100% सभी उत्तरदाताओं ने हाँ में उत्तर दिया व 0% ने नहीं में उत्तर दिया।

प्रश्न संख्या 5 : क्या उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इंटरनेट उपयोगी है –

1. हाँ 100%
2. नहीं 0%

प्रश्न संख्या 5 में उत्तरदाताओं से यह प्रश्न पूछा गया कि क्या उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इंटरनेट उपयोगी है, तो 100% सभी ने हाँ में उत्तर दिया व 0% ने नही में उत्तर दिया।

प्रश्न संख्या 6 : क्या आप शिक्षा के क्षेत्र में इंटरनेट के उपयोग से संतुष्ट है –

1. हाँ 95%
2. नहीं 5%

प्रश्न संख्या 6 में जब उत्तरदाताओं से यह प्रश्न पूछा गया कि क्या आप शिक्षा के क्षेत्र में इंटरनेट के उपयोग से संतुष्ट है, तो 95% ने हाँ में उत्तर दिए व 5% ने नहीं में उत्तर दिया।

प्रश्न संख्या 7 : क्या इंटरनेट उच्च शिक्षा में अध्ययन हेतु विश्वसनीय माध्यम है –

1. हाँ 88%
2. नहीं 12%

प्रश्न संख्या 7 में जब उत्तरदाताओं से पूछा गया कि क्या इंटरनेट उच्च शिक्षा में अध्ययन हेतु विश्वसनीय माध्यम है, तो 88% ने कहाँ कि हाँ व 12% ने नहीं में उत्तर दिया।

प्रश्न संख्या 8 : आप इंटरनेट के उपयोग में किस भाषा को सरल मानते है-

1. हिंदी 18%
2. अंग्रेजी 73%
3. दोनों 9%

प्रश्न संख्यं 8 में उत्तरदाताओं से पूछा गया कि आप इंटरनेट के उपयोग में किस भाषा को सरल मानते है, तो 18% ने हिंन्दी 73% ने कहाँ कि अंग्रेजी व 9% ने दोनों भाषाओं को इंटरनेट के उपयोग में सरल मानते है।

प्रश्न संख्या 9 : क्या आपको इंटरनेट के उपयोग में भाषाई समस्या आती है-

1. हाँ 47%
2. नहीं 53%

प्रश्न संख्या 9 में जब उत्तरदाताओं से यह पूछा गया कि क्या आपको इंटरनेट के उपयोग में भाषाई समस्या आती है, तो 47% ने हाँ में व 53% ने नहीं में उत्तर दिया।

निष्कर्ष : –

प्रस्तुत शोध-पत्र के लिए किए गए सर्वे के परिणाम बहुत ही रोचक हैं। शोध-सर्वे के अनुसार 96% उत्तरदाता शैक्षिक कार्यों के लिए इंटरनेट का उपयोग करते हैं। पाठ्य-पुस्तकों का उपयोग इंटरनेट की तुलना में अधिक है। उच्च शिक्षा में इन्टरनेट उपयोग के कारण सामने आये हैं। इनमें प्रमुख है- इंटरनेट पर पाठ्य-सामग्री की अधिक उपलब्धता बाजार तथा पुस्तकालयों में किताबें आसानी से उपलब्ध ना होना, किताबों के महंगी होनी की वजह से विधार्थी इन्टरनेट का उपयोग कर रहें है क्योंकि किताबों की तुलना में इन्टरनेट एक सस्ता माध्यम है। सभी उत्तरदाता मानते हैं कि इन्टरनेट एक सस्ता माध्यम है। सभी उत्तरदाता मानते है कि इन्टरनेट के उपयोग ने उच्च शिक्षा को आसान बनाया है इसलिए वर्तमान समय में इन्टरनेट उच्च शिक्षा के लिए उपयोगी माध्यम है। सिर्फ 5% उत्तरदाता इन्टरनेट के उपयोग से सन्तुष्ट नहीं हैं तथा 88% उत्तरदाता इन्टरनेट को उच्च शिक्षा में उपयोग के लिए विश्वसनीय माध्यम मानते हैं। 82% उत्तरदाता इन्टरनेट के उपयोग में अंग्रजी भाषा को सरल मानते हैं, क्योंकि इंटरनेट पर अधिकतम पाठ्य-सामग्री अंग्रेजी भाषा में ही उपलब्ध है, लेकिन 47% लोगों को अंग्रेजी भाषा की वजहा से इन्टरनेट में समस्या का सामना करना पड़ता है।

संदर्भ :

  1. http://aaj-samaj.blogspot.com/2011/03/blog-post.html
  2. cri.cn/1/2004/10/111@16097.html
  3. रवीन्द्रनाथ प्रताप सिंह, दूरसंचार : दृश्य-परिदृश्य, आचार्य प्रकाशन, राजरूपपुर, इलाहाबाद, पृष्ठ-147।
  4. ग्लोबल डिजिटल मीडिया . ई शिक्षा, ई लर्निंग और ई सरकार रुझान और सांख्यिकी BuddeComm – BuddeComm.htm
  5. दूरस्थ शिक्षा समाजिक सरोकार एवं मीडिया।
  6. अरविन्द कुमार शर्मा, शोध प्रविधियाँ एवं सूचना प्रौद्योगिकी, ई.एस.एस. पब्लिकेशन, देल्ही; 2008 ।
  7. एस के मंगल एवं उमा मंगल शिक्षा तकनीकी, पी.एच.एल. लर्निंग, देल्ही, 2009।
  8. आशा गुप्ता उच्च शिक्षा के बदलते आयाम हिंदी माध्यम कार्यान्वय निदेशालय, दिल्ली विश्वविद्यालय 2011।
  9. डॉ. सन्तोष मित्तल, शैक्षिक तकनीकी एवं कक्षा-कक्ष प्रबन्ध, राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ एकादमी, जयपुर 2011।
  10. जे.सी. अग्रवाल, एवं एस.एस.गुप्ता, शैक्षिक तकनीकी, शिपरा पब्लिकेशन, 2011।
  11. श्री जगदीश प्रसाद झाबरमल टिबरेवेवाला विश्वविद्यालय की पीएच.डी. (हिन्दी) उपाधि के लिए प्रस्तावित शोध -प्रबन्ध

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