

COMMUNICATION TODAY
Media Quarterly (Journal)
(Lighthouse of Media Professionals)
A Double-Blind Peer-Reviewed Bilingual Media Quarterly
195th National Webinar | Jan 20, 2025

📅 Date: Tuesday | Jan 20, 2025
🕠 Time: 5:30 PM onwards
💻 Mode: Online (Webinar)
🟢 Organised by: Communication Today (Quarterly Media Journal, Jaipur)
🤝 In collaboration with: Bharati Vidyapeeth, New Delhi
🎯 Subject: Digital Storytelling for Science Communicators
📢 Speaker:
- Dr. Shahnaaz Zabi
Head, Faculty of Journalism and Mass Communication
Usha Martin University, Ranchi
🗓 Schedule:
🔹 Login & Networking: 5:30 PM – 6:00 PM
🔹 Experts’ Talks: 6:00 PM – 7:15 PM
🔹 Discussion & Certification: From 7:15 PM onward
🔗 Join the Webinar:
👉 https://bvicam.webex.com/meet/webinar
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📝 Advance Registration (Free):
👉 https://bvicam.ac.in/MediaSeries/
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With warm regards,
Prof. Sanjeev Bhanawat Editor, Communication Today, Jaipur
Prof. M. N. Hoda Director, Bharati Vidyapeeth, New Delhi
194th National Webinar | Jan 12, 2025
194वां राष्ट्रीय वेबिनार
विषय: Digital Media and Mainstream Journalism: Opportunities and Threats
आयोजक: कम्युनिकेशन टुडे एवं भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली
जयपुर से प्रकाशित प्रतिष्ठित मीडिया त्रैमासिक कम्युनिकेशन टुडे और भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 194वें राष्ट्रीय वेबिनार में “Digital Media and Mainstream Journalism: Opportunities and Threats” विषय पर एक गंभीर, विचारोत्तेजक और समसामयिक परिचर्चा आयोजित की गई।
मुख्य वक्ता के रूप में हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, जयपुर के न्यू मीडिया विभाग की अध्यक्ष डॉ. शालिनी जोशी ने कहा कि पत्रकारिता की शुरुआत एक मिशनरी भावना के साथ हुई थी, जहाँ समाज के प्रति उत्तरदायित्व सर्वोपरि था। समय के साथ पत्रकारिता का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। आज हर सेकेंड ही डेडलाइन बन चुका है और निरंतर अपडेट की दौड़ ने पत्रकारिता की गति को अभूतपूर्व बना दिया है।
उन्होंने कहा कि पहले 24×7 न्यूज़ चैनलों की बात होती थी, लेकिन वास्तविक अर्थों में 24×7 पत्रकारिता को डिजिटल मीडिया ने स्थापित किया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने पत्रकार को चौबीसों घंटे सक्रिय रहने की नई चुनौती दी है।
उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में मीडिया साक्षरता (Media Literacy) समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, ताकि समाज सही और गलत सूचना के बीच भेद कर सके और पत्रकारिता अपने मूल मूल्यों की रक्षा कर सके।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार केंद्र के पूर्व अध्यक्ष एवं कम्युनिकेशन टुडे के संपादक प्रो. संजीव भानावत ने कहा कि डिजिटल मीडिया और मुख्यधारा की पत्रकारिता के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सहयोग ने पत्रकारिता के स्वरूप को नए सिरे से परिभाषित किया है। जहाँ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने सूचना की गति, पहुँच और सहभागिता को बढ़ाया है, वहीं फेक न्यूज़ और विश्वसनीयता का संकट भी गहराया है। आर्थिक दबाव और क्लिकबेट संस्कृति ने पारंपरिक मीडिया के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों और पेशेवर पत्रकारिता के बीच संतुलन से ही एक स्वस्थ मीडिया इकोसिस्टम संभव है।
कार्यक्रम में प्रियंका सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की तथा आमंत्रित वक्ताओं का ई-बुक एवं ई-स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में जयंत राठी, पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. सुनील कुमार, अंबुश (भारती विद्यापीठ) एवं डॉ. पृथ्वी सेंगर (IIMT यूनिवर्सिटी, मेरठ) का सराहनीय सहयोग रहा।
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Special Moments
डॉ महेंद्र भानावत
लोकपरंपराओं के अडिग प्रहरी को अंतिम प्रणाम
लोक साहित्य, परंपराओं और संस्कृति के महान संरक्षक डॉ. महेंद्र भानावत का निधन एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने जीवन को भारतीय लोककथाओं, लोकगीतों, कठपुतली कला और परंपरागत लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में समर्पित किया। उनके लेखन का विस्तार अत्यंत व्यापक था—उन्होंने लगभग 100 पुस्तकें लिखीं, 10,000 से अधिक लेख प्रकाशित किए और अपने विशिष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के 80 से अधिक पुरस्कार प्राप्त किए।
डॉ. भानावत ने लोकसंस्कृति को शोधपरक दृष्टि से प्रस्तुत कर उसे नई पहचान दिलाई। उनकी विद्वता, सरलता और समर्पण भाव ने उन्हें लोकसंस्कृति जगत में एक विशिष्ट स्थान दिलाया।
आज उनके उड़ावणा के अवसर पर हम उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनके विचार और कार्य सदा अमर रहेंगे।
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एक मुलाकातः रीना अशोक जारोली से
प्रेम की मिसाल: पति को किडनी दान और कैंसर से संघर्ष
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही एक महिला के लिए जीवन पहले से ही एक चुनौती बन जाता है। ऐसे में इस महिला ने न केवल अपनी बीमारी से संघर्ष किया, बल्कि अपने पति के जीवन को बचाने के लिए उसे अपनी किडनी भी दान कर दी। यह निर्णय न केवल साहस और निस्वार्थता का परिचायक है, बल्कि यह हमें मानवीय शक्ति और करुणा की गहराई का भी अहसास कराता है।
इस कहानी के विभिन्न आयाम हैं। पहला आयाम है, संघर्ष और विजय का। कैंसर जैसी बीमारी से लड़ते हुए, शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम बने रहना, और उसके बावजूद अपने पति की ज़रूरत को प्राथमिकता देना अद्वितीय साहस का उदाहरण है। यह महिला न केवल एक योद्धा है, बल्कि एक ऐसी प्रेरणा है, जो हमें सिखाती है कि कठिनाइयों के बावजूद भी हम दूसरों के लिए कितनी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
दूसरा आयाम है, निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का। पति-पत्नी के रिश्ते की यह कहानी हमें यह दिखाती है कि सच्चे प्रेम और समर्पण में कोई सीमा नहीं होती। यह महिला हमें यह सिखाती है कि प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में भी व्यक्त होता है।

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कहा फेक न्यूज़ की बढ़ती प्रवृत्ति के दौर में मीडिया लिटरेसी आज की महती आवश्यकता
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