

COMMUNICATION TODAY
Media Quarterly (Journal)
(Lighthouse of Media Professionals)
A Double-Blind Peer-Reviewed Bilingual Media Quarterly
205th National Webinar | Mar 27, 2026

📅 Date: Friday | Mar 27, 2026
🕠 Time: 5:30 PM onwards
💻 Mode: Online (Webinar)
🟢 Organised by: Communication Today (Quarterly Media Journal, Jaipur)
🤝 In collaboration with: Bharati Vidyapeeth, New Delhi
🎯 Subject: थिएटर से कैमरे तक : अभिनय की यात्रा और चुनौतियाँ
दर्शन दवे एक बहुआयामी कलाकार हैं, जिन्होंने अभिनय, निर्देशन और लेखन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। थिएटर से अपने करियर की शुरुआत करने वाले दर्शन दवे ने मंच से लेकर कैमरे तक की यात्रा में कई महत्वपूर्ण पड़ाव तय किए हैं। उन्होंने टेलीविजन के अनेक लोकप्रिय धारावाहिकों जैसे “घर एक सपना”, “बेगूसराय”, “क्राइम पैट्रॉल” और “दूसरी माँ” में अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया है।
मंच और कैमरे—दोनों माध्यमों पर उनकी समान पकड़ उन्हें एक संपूर्ण कलाकार बनाती है। एक अभिनेता,निर्देशक और लेखक के रूप में भी उन्होंने कई रचनात्मक परियोजनाओं को सफलतापूर्वक साकार किया है।
वर्तमान में वे अभिनय प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं और अपनी अकादमी के माध्यम से नई पीढ़ी को थिएटर, कैमरा अभिनय तथा व्यक्तित्व विकास का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं।
Eminent Scholar:
- Darshan Dave
Actor, Director, Writer
Jaipur
🗓 Schedule:
🔹 Login & Networking: 5:30 PM – 6:00 PM
🔹 Experts’ Talks: 6:00 PM – 7:15 PM
🔹 Discussion & Certification: From 7:15 PM onward
🔗 Join the Webinar:
👉 Webinar Link: https://bvicam.webex.com/meet/webinar
📺 Live Streaming on YouTube:
👉 https://www.youtube.com/channel/UCuOPY-98JUY9T2igRpj8tIQ/featured
📝 Advance Registration (Free):
👉 https://bvicam.ac.in/MediaSeries/
📄 Get Your Certificate:
Fill the feedback form at the end of the webinar. The certificate will be auto-generated and free of cost.
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With warm regards,
Prof. Sanjeev Bhanawat Editor, Communication Today, Jaipur
Prof. M. N. Hoda Director, Bharati Vidyapeeth, New Delhi
204th National Webinar | Mar 23, 2026
204वाँ राष्ट्रीय वेबिनार
विषय: “TV@100: Television in the Age of Streaming and Smartphones”
आयोजक: कम्युनिकेशन टुडे एवं भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली
दिनांक: सोमवार, 23 मार्च 2026
जयपुर से प्रकाशित प्रतिष्ठित मीडिया त्रैमासिक कम्युनिकेशन टुडे तथा भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 204वें राष्ट्रीय वेबिनार में “TV@100: Television in the Age of Streaming and Smartphones” विषय पर अत्यंत गंभीर, समसामयिक एवं दूरगामी महत्व का सार्थक विमर्श संपन्न हुआ।
मुख्य वक्ता के रूप में डीडी राजस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. ओम प्रकाश ने अपने गीत “हमारा होता रहे संचार” के माध्यम से संचार, संस्कृति और दर्शन का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय में तकनीक निरंतर परिवर्तित होती रहती है, किंतु “कंटेंट ही किंग” बना रहता है। भारतीय समाज की आध्यात्मिक प्रकृति का उल्लेख करते हुए उन्होंने “पिंड ही ब्रह्मांड है” की अवधारणा को रेखांकित किया, जो संचार की व्यापकता और गहनता को अभिव्यक्त करती है। “100 वर्ष पूर्ण होना” को उन्होंने केवल जीवन-समाप्ति का मुहावरा न मानते हुए एक ऐतिहासिक पड़ाव बताया, जो टेलीविजन के विकास, प्रासंगिकता और निरंतरता का प्रतीक है।
आईआईएमसी, ढेंकनाल (ओडिशा) के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक प्रो. मृणाल चटर्जी ने अपने व्याख्यान में भारत में टेलीविजन के विकास के प्रमुख ऐतिहासिक पड़ावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि टेलीविजन ने समय के साथ न केवल तकनीकी बदलाव देखे हैं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों पर भी गहरा प्रभाव डाला है।
उन्होंने कहा कि एक समय था जब टेलीविजन सामूहिक देखने का माध्यम था, जहाँ पूरा परिवार एक साथ बैठकर कार्यक्रमों का आनंद लेता था। किंतु वर्तमान में यह प्रवृत्ति बदलकर व्यक्तिगत (पर्सनलाइज़्ड) देखने की ओर अग्रसर हो गई है। इसके बावजूद उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में पुनः सामूहिक देखने की संस्कृति का पुनरुत्थान संभव है। प्रो. चटर्जी ने टेलीविजन के प्रभाव से पारिवारिक संबंधों, संवाद शैली और व्यवहार में आए परिवर्तनों का भी गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार केंद्र के पूर्व अध्यक्ष एवं कम्युनिकेशन टुडे के संपादक प्रो. संजीव भानावत ने कहा कि टेलीविजन के 100 वर्ष पूरे होने का संदर्भ केवल समय का संकेत नहीं, बल्कि संचार क्रांति के एक ऐतिहासिक पड़ाव का प्रतीक है। वर्ष 1926 में John Logie Baird द्वारा किए गए प्रथम सार्वजनिक प्रदर्शन ने दृश्य संचार के एक नए युग का सूत्रपात किया। इसके बाद टेलीविजन ने सूचना, शिक्षा और मनोरंजन के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया। आज, स्ट्रीमिंग और स्मार्टफोन के युग में भी टेलीविजन अपनी प्रासंगिकता बनाए रखते हुए निरंतर रूपांतरण की प्रक्रिया से गुजर रहा है। “TV@100” इस यात्रा की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर गंभीर चिंतन का अवसर प्रदान करता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारती विद्यापीठ की सहायक प्राध्यापक सुश्री प्रियंका सिंह द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की। तत्पश्चात मुख्य वक्ता को ई-बुके एवं ई-स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में जयंत राठी, पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. सुनील कुमार तथा भारती विद्यापीठ के अंबुश का विशेष योगदान रहा।
अंत में प्रतिभागियों एवं दर्शकों से आग्रह किया गया कि वे इस सार्थक विमर्श को अधिक से अधिक साझा करें तथा वीडियो को Like, Comment, Share और Subscribe कर आगामी वेबिनारों से जुड़े रहें।
Special Moments
डॉ महेंद्र भानावत
लोकपरंपराओं के अडिग प्रहरी को अंतिम प्रणाम
लोक साहित्य, परंपराओं और संस्कृति के महान संरक्षक डॉ. महेंद्र भानावत का निधन एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने जीवन को भारतीय लोककथाओं, लोकगीतों, कठपुतली कला और परंपरागत लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में समर्पित किया। उनके लेखन का विस्तार अत्यंत व्यापक था—उन्होंने लगभग 100 पुस्तकें लिखीं, 10,000 से अधिक लेख प्रकाशित किए और अपने विशिष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के 80 से अधिक पुरस्कार प्राप्त किए।
डॉ. भानावत ने लोकसंस्कृति को शोधपरक दृष्टि से प्रस्तुत कर उसे नई पहचान दिलाई। उनकी विद्वता, सरलता और समर्पण भाव ने उन्हें लोकसंस्कृति जगत में एक विशिष्ट स्थान दिलाया।
आज उनके उड़ावणा के अवसर पर हम उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनके विचार और कार्य सदा अमर रहेंगे।
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एक मुलाकातः रीना अशोक जारोली से
प्रेम की मिसाल: पति को किडनी दान और कैंसर से संघर्ष
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही एक महिला के लिए जीवन पहले से ही एक चुनौती बन जाता है। ऐसे में इस महिला ने न केवल अपनी बीमारी से संघर्ष किया, बल्कि अपने पति के जीवन को बचाने के लिए उसे अपनी किडनी भी दान कर दी। यह निर्णय न केवल साहस और निस्वार्थता का परिचायक है, बल्कि यह हमें मानवीय शक्ति और करुणा की गहराई का भी अहसास कराता है।
इस कहानी के विभिन्न आयाम हैं। पहला आयाम है, संघर्ष और विजय का। कैंसर जैसी बीमारी से लड़ते हुए, शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम बने रहना, और उसके बावजूद अपने पति की ज़रूरत को प्राथमिकता देना अद्वितीय साहस का उदाहरण है। यह महिला न केवल एक योद्धा है, बल्कि एक ऐसी प्रेरणा है, जो हमें सिखाती है कि कठिनाइयों के बावजूद भी हम दूसरों के लिए कितनी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
दूसरा आयाम है, निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का। पति-पत्नी के रिश्ते की यह कहानी हमें यह दिखाती है कि सच्चे प्रेम और समर्पण में कोई सीमा नहीं होती। यह महिला हमें यह सिखाती है कि प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में भी व्यक्त होता है।

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