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COMMUNICATION TODAY

Media Quarterly (Journal)

(Lighthouse of Media Professionals)
A Double-Blind Peer-Reviewed Bilingual Media Quarterly

196th National Webinar | Fab 02, 2025

📅 Date: Monday | Fab 02, 2026
🕠 Time: 5:30 PM onwards
💻 Mode: Online (Webinar)
🟢 Organised by: Communication Today (Quarterly Media Journal, Jaipur)
🤝 In collaboration with: Bharati Vidyapeeth, New Delhi
🎯 Subject: Digital Shift of PR: More Marketing, less PR
📢 Speaker:

  • Dr Ratan Singh Shekhawat
    Head, Department of Media Studies
    HJU, Jaipur

🗓 Schedule:
🔹 Login & Networking: 5:30 PM – 6:00 PM
🔹 Experts’ Talks: 6:00 PM – 7:15 PM
🔹 Discussion & Certification: From 7:15 PM onward

🔗 Join the Webinar:
👉 https://bvicam.webex.com/meet/webinar
📺 Live Streaming on YouTube:
👉 https://www.youtube.com/channel/UCuOPY-98JUY9T2igRpj8tIQ/featured
📝 Advance Registration (Free):
👉 https://bvicam.ac.in/MediaSeries/

📄 Get Your Certificate:
Fill the feedback form at the end of the webinar. The certificate will be auto-generated and free of cost.

🎥 Missed the last session?
📌 Watch the 195th Webinar Recording:
👉 https://youtu.be/lZGjdViKUJs
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With warm regards,
Prof. Sanjeev Bhanawat Editor, Communication Today, Jaipur
Prof. M. N. Hoda Director, Bharati Vidyapeeth, New Delhi

195th National Webinar | Jan 20, 2025

195वां राष्ट्रीय वेबिनार
विषय
: Digital Storytelling for Science Communicators
आयोजक: कम्युनिकेशन टुडे एवं भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली
दिनांक: गुरुवार, 20 जनवरी 2026

जयपुर से प्रकाशित प्रतिष्ठित मीडिया त्रैमासिक कम्युनिकेशन टुडे और भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 195वें राष्ट्रीय वेबिनार में “Digital Storytelling for Science Communicators” विषय पर एक गंभीर, विचारोत्तेजक और समसामयिक परिचर्चा आयोजित की गई।

मुख्य वक्ता के रूप में उषा मार्टिन विश्वविद्यालय, रांची (झारखंड) में पत्रकारिता एवं जनसंचार की विभागाध्यक्ष डॉ. शाहनाज़ ज़ाबी ने कहा कि शिक्षा से ही दिशा और समझ विकसित होती है। उन्होंने कहा कि समाज अक्सर संकटों को ईश्वर के कोप के रूप में देखता है, जबकि विज्ञान संचार इस भय को दूर कर घटनाओं को तार्किक और वैज्ञानिक ढंग से समझने में मदद करता है।

डॉ. ज़ाबी ने स्पष्ट किया कि विज्ञान तात्कालिक उत्तर देने के बजाय विश्वसनीयता के साथ तथ्य प्रस्तुत करता है। इसे बुखार की तरह तात्कालिक प्रतिक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि गहरी समझ और प्रमाणिकता के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान रोचक प्रश्न उठाता है, न कि संवेदनशीलता या सनसनी फैलाने के लिए।

उन्होंने कई वेब सीरीज़ और फिल्मों के उदाहरण दिए, जो वैज्ञानिक आधार पर सूचना और ज्ञान का प्रसार कर रही हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म को उन्होंने एक चुनौती बताया और कहा कि डिजिटल स्टोरीटेलर सरल, सहज और समझने योग्य भाषा का स्वामी होता है, तभी विज्ञान जनसंवाद का रूप ले पाता है।

कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार केंद्र के पूर्व अध्यक्ष एवं कम्युनिकेशन टुडे के संपादक प्रो. संजीव भानावत ने कहा कि डिजिटल युग में विज्ञान संचार को प्रभावी बनाने में डिजिटल स्टोरीटेलिंग की भूमिका तेज़ी से बढ़ रही है। यह माध्यम विज्ञान को केवल आँकड़ों और शोध तक सीमित न रखकर मानवीय अनुभवों और कहानियों के माध्यम से आम लोगों तक पहुँचाता है। जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य और तकनीक जैसे जटिल विषय किसान, परिवार और समाज से जुड़ी कथाओं के जरिए अधिक सहज रूप में समझाए जा रहे हैं। फेक न्यूज़ के बढ़ते दौर में डिजिटल स्टोरीटेलिंग सही जानकारी को रोचक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत कर जन-जागरूकता बढ़ाने में सहायक सिद्ध हो रही है। भारतीय संदर्भ में स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक उदाहरण इसे विज्ञान को एलिट ज्ञान से जनज्ञान में बदलने का सशक्त माध्यम बनाते हैं।

इस चर्चा में भारती विद्यापीठ की प्रो. शील त्रिपाठी ने भी सक्रिय रूप से हस्तक्षेप किया और अपने विचारों से विमर्श को और अधिक समृद्ध बनाया।

कार्यक्रम में प्रियंका सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की तथा आमंत्रित वक्ताओं का ई-बुक एवं ई-स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में जयंत राठी, पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. सुनील कुमार, अंबुश (भारती विद्यापीठ) एवं डॉ. पृथ्वी सेंगर (IIMT यूनिवर्सिटी, मेरठ) का सराहनीय सहयोग रहा।

इस वेबिनार में रिकॉर्ड 101 प्रतिभागियों की सहभागिता रही, जो इसकी लोकप्रियता, प्रासंगिकता और विषय के प्रति गहरी रुचि को दर्शाती है। कृपया वीडियो LIKE करें, COMMENT करें, SHARE करें और चैनल को SUBSCRIBE करें ताकि आप ऐसे ही उपयोगी वेबिनार्स और चर्चाओं से जुड़े रहें।

Special Moments

डॉ महेंद्र भानावत

लोकपरंपराओं के अडिग प्रहरी को अंतिम प्रणाम

लोक साहित्य, परंपराओं और संस्कृति के महान संरक्षक डॉ. महेंद्र भानावत का निधन एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने जीवन को भारतीय लोककथाओं, लोकगीतों, कठपुतली कला और परंपरागत लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में समर्पित किया। उनके लेखन का विस्तार अत्यंत व्यापक था—उन्होंने लगभग 100 पुस्तकें लिखीं, 10,000 से अधिक लेख प्रकाशित किए और अपने विशिष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के 80 से अधिक पुरस्कार प्राप्त किए।

डॉ. भानावत ने लोकसंस्कृति को शोधपरक दृष्टि से प्रस्तुत कर उसे नई पहचान दिलाई। उनकी विद्वता, सरलता और समर्पण भाव ने उन्हें लोकसंस्कृति जगत में एक विशिष्ट स्थान दिलाया।

आज उनके उड़ावणा के अवसर पर हम उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनके विचार और कार्य सदा अमर रहेंगे।

➡ यह वीडियो अगर आपको पसंद आए तो चैनल को सब्सक्राइब करें, शेयर करें और अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करें।

एक मुलाकातः रीना अशोक जारोली से

प्रेम की मिसाल: पति को किडनी दान और कैंसर से संघर्ष

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही एक महिला के लिए जीवन पहले से ही एक चुनौती बन जाता है। ऐसे में इस महिला ने न केवल अपनी बीमारी से संघर्ष किया, बल्कि अपने पति के जीवन को बचाने के लिए उसे अपनी किडनी भी दान कर दी। यह निर्णय न केवल साहस और निस्वार्थता का परिचायक है, बल्कि यह हमें मानवीय शक्ति और करुणा की गहराई का भी अहसास कराता है।

इस कहानी के विभिन्न आयाम हैं। पहला आयाम है, संघर्ष और विजय का। कैंसर जैसी बीमारी से लड़ते हुए, शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम बने रहना, और उसके बावजूद अपने पति की ज़रूरत को प्राथमिकता देना अद्वितीय साहस का उदाहरण है। यह महिला न केवल एक योद्धा है, बल्कि एक ऐसी प्रेरणा है, जो हमें सिखाती है कि कठिनाइयों के बावजूद भी हम दूसरों के लिए कितनी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

दूसरा आयाम है, निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का। पति-पत्नी के रिश्ते की यह कहानी हमें यह दिखाती है कि सच्चे प्रेम और समर्पण में कोई सीमा नहीं होती। यह महिला हमें यह सिखाती है कि प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में भी व्यक्त होता है।

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कुलपति प्रो० सतपाल बिष्ट ने त्रैमासिक जर्नल कम्युनिकेशन टुडे का किया लोकार्पण

कहा फेक न्यूज़ की बढ़ती प्रवृत्ति के दौर में मीडिया लिटरेसी आज की महती आवश्यकता
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