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COMMUNICATION TODAY

Media Quarterly (Journal)

(Lighthouse of Media Professionals)
A Double-Blind Peer-Reviewed Bilingual Media Quarterly

198th National Webinar | Fab 12, 2026

📅 Date: Thursday | Fab 12, 2026
🕠 Time: 5:30 PM onwards
💻 Mode: Online (Webinar)
🟢 Organised by: Communication Today (Quarterly Media Journal, Jaipur)
🤝 In collaboration with: Bharati Vidyapeeth, New Delhi
🎯 Subject: Future of Radio
📢 Speaker:

  • Dr. R. Sreedher
    Recipient of Padma Shri award 2026 for Radio Broadcasting
    Father of the Community Radio Movement in India
    Professor Emeritus
    Apeejay Stya University, Gurugram, Haryana

🗓 Schedule:
🔹 Login & Networking: 5:30 PM – 6:00 PM
🔹 Experts’ Talks: 6:00 PM – 7:15 PM
🔹 Discussion & Certification: From 7:15 PM onward

🔗 Join the Webinar:
👉 https://bvicam.webex.com/meet/webinar
📺 Live Streaming on YouTube:
👉 https://www.youtube.com/channel/UCuOPY-98JUY9T2igRpj8tIQ/featured
📝 Advance Registration (Free):
👉 https://bvicam.ac.in/MediaSeries/

📄 Get Your Certificate:
Fill the feedback form at the end of the webinar. The certificate will be auto-generated and free of cost.

🎥 Missed the last session?
📌 Watch the 197th Webinar Recording:
👉 https://youtu.be/quqKu9MNuq0
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With warm regards,
Prof. Sanjeev Bhanawat Editor, Communication Today, Jaipur
Prof. M. N. Hoda Director, Bharati Vidyapeeth, New Delhi

197th National Webinar | Fab 06, 2026

197वां राष्ट्रीय वेबिनार
विषय
: Media Economics in the Age of Convergence
आयोजक: कम्युनिकेशन टुडे एवं भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली
दिनांक: सोमवार, 6 फरवरी 2026

जयपुर से प्रकाशित प्रतिष्ठित मीडिया त्रैमासिक कम्युनिकेशन टुडे एवं भारती विद्यापीठ, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 197वें राष्ट्रीय वेबिनार में “Media Economics in the Age of Convergence” विषय पर गंभीर, विचारोत्तेजक और अत्यंत समसामयिक परिचर्चा संपन्न हुई। कार्यक्रम में देशभर के मीडिया शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में प्रोफेसर एवं पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. अनुराग दवे ने अपने व्याख्यान में कहा कि मीडिया कन्वर्जेंस के वर्तमान दौर में भारतीय मीडिया बाज़ार तीव्र आर्थिक परिवर्तन से गुजर रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, ओटीटी सेवाओं और मोबाइल इंटरनेट के विस्तार ने कंटेंट वितरण और राजस्व मॉडल को नए सिरे से परिभाषित किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज विज्ञापन, सदस्यता और हाइब्रिड मॉडल समानांतर रूप से सक्रिय हैं, जबकि “अटेंशन इकॉनॉमी” में दर्शकों का समय ही सबसे बड़ी पूंजी बन चुका है। 900 मिलियन से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के साथ भारत स्केल-आधारित अर्थव्यवस्था का लाभ उठा रहा है। जियो क्रांति, ओटीटी प्रतिस्पर्धा और क्षेत्रीय भाषा सामग्री के विस्तार ने मीडिया बाजार को नई गति दी है। तथापि, कम एआरपीयू, बढ़ती कंटेंट लागत और एकाधिकार की प्रवृत्ति गंभीर चुनौतियों के रूप में सामने हैं। उन्होंने बल दिया कि नवाचार, डेटा-आधारित रणनीति और विविध राजस्व स्रोत ही भविष्य की दिशा निर्धारित करेंगे।

कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए राजस्थान विश्वविद्यालय के जनसंचार केंद्र के पूर्व अध्यक्ष एवं कम्युनिकेशन टुडे के संपादक प्रो. संजीव भानावत ने कहा कि मीडिया कन्वर्जेंस के युग में मीडिया अर्थशास्त्र ने गहरे संरचनात्मक परिवर्तन का अनुभव किया है। डिजिटल तकनीकों के कारण प्रिंट, रेडियो, टेलीविजन और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म एकीकृत हो गए हैं, जिससे राजस्व मॉडल, लागत संरचना और बाज़ार प्रतिस्पर्धा की प्रकृति में व्यापक बदलाव आया है। पारंपरिक विज्ञापन-आधारित मॉडल अब डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, पेवॉल और सदस्यता प्रणालियों की ओर अग्रसर हैं। डेटा एनालिटिक्स और एल्गोरिदम कंटेंट रणनीति को प्रभावित कर रहे हैं, वहीं बड़ी टेक कंपनियों का बढ़ता प्रभुत्व मीडिया स्वायत्तता के लिए चुनौती बन रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिरता और सामाजिक उत्तरदायित्व के संतुलन के साथ नवाचार ही भविष्य के मीडिया परिदृश्य को दिशा देगा।

कार्यक्रम में फकीर मोहन विश्वविद्यालय, बालासोर, ओडिशा में पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर (पी.जी.) विभाग की सहायक प्रोफ़ेसर डॉ. स्मिति पाधी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम का मंगलारंभ किया। भारती विद्यापीठ के स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में सहायक प्रोफेसर जयंत राठी ने आमंत्रित वक्ता को ई-बुक एवं ई-स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. सुनील कुमार, अंबुश (भारती विद्यापीठ) एवं डॉ. पृथ्वी सेंगर (IIMT यूनिवर्सिटी, मेरठ) का सराहनीय सहयोग रहा।

अंत में आयोजकों ने दर्शकों से अनुरोध किया कि वे वीडियो को LIKE करें, COMMENT करें, SHARE करें तथा चैनल को SUBSCRIBE करें, ताकि वे ऐसे ही उपयोगी वेबिनारों और सार्थक विमर्शों से निरंतर जुड़े रह सकें।

Special Moments

डॉ महेंद्र भानावत

लोकपरंपराओं के अडिग प्रहरी को अंतिम प्रणाम

लोक साहित्य, परंपराओं और संस्कृति के महान संरक्षक डॉ. महेंद्र भानावत का निधन एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने जीवन को भारतीय लोककथाओं, लोकगीतों, कठपुतली कला और परंपरागत लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में समर्पित किया। उनके लेखन का विस्तार अत्यंत व्यापक था—उन्होंने लगभग 100 पुस्तकें लिखीं, 10,000 से अधिक लेख प्रकाशित किए और अपने विशिष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के 80 से अधिक पुरस्कार प्राप्त किए।

डॉ. भानावत ने लोकसंस्कृति को शोधपरक दृष्टि से प्रस्तुत कर उसे नई पहचान दिलाई। उनकी विद्वता, सरलता और समर्पण भाव ने उन्हें लोकसंस्कृति जगत में एक विशिष्ट स्थान दिलाया।

आज उनके उड़ावणा के अवसर पर हम उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनके विचार और कार्य सदा अमर रहेंगे।

➡ यह वीडियो अगर आपको पसंद आए तो चैनल को सब्सक्राइब करें, शेयर करें और अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करें।

एक मुलाकातः रीना अशोक जारोली से

प्रेम की मिसाल: पति को किडनी दान और कैंसर से संघर्ष

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही एक महिला के लिए जीवन पहले से ही एक चुनौती बन जाता है। ऐसे में इस महिला ने न केवल अपनी बीमारी से संघर्ष किया, बल्कि अपने पति के जीवन को बचाने के लिए उसे अपनी किडनी भी दान कर दी। यह निर्णय न केवल साहस और निस्वार्थता का परिचायक है, बल्कि यह हमें मानवीय शक्ति और करुणा की गहराई का भी अहसास कराता है।

इस कहानी के विभिन्न आयाम हैं। पहला आयाम है, संघर्ष और विजय का। कैंसर जैसी बीमारी से लड़ते हुए, शारीरिक और मानसिक रूप से सक्षम बने रहना, और उसके बावजूद अपने पति की ज़रूरत को प्राथमिकता देना अद्वितीय साहस का उदाहरण है। यह महिला न केवल एक योद्धा है, बल्कि एक ऐसी प्रेरणा है, जो हमें सिखाती है कि कठिनाइयों के बावजूद भी हम दूसरों के लिए कितनी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

दूसरा आयाम है, निस्वार्थ प्रेम और समर्पण का। पति-पत्नी के रिश्ते की यह कहानी हमें यह दिखाती है कि सच्चे प्रेम और समर्पण में कोई सीमा नहीं होती। यह महिला हमें यह सिखाती है कि प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में भी व्यक्त होता है।

Latest News

कुलपति प्रो० सतपाल बिष्ट ने त्रैमासिक जर्नल कम्युनिकेशन टुडे का किया लोकार्पण

कहा फेक न्यूज़ की बढ़ती प्रवृत्ति के दौर में मीडिया लिटरेसी आज की महती आवश्यकता
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