भारतीय चित्रकारों की कलाकृतियों का बाजार में महत्त्व

डॉ. मोनिका गुप्ता*

किसी भी देश की संस्कृति एवं सभ्यता का मूल्यांकन कला के माध्यम से किया जाता है। कला से सौन्दर्य की उत्पत्ति होती है। सौन्दर्य के प्रतिमान स्थान, काल तथा परिस्थिति के अनुसार परिवर्तित होते रहते हैं, जिसके कारण कला का स्वरूप भी समयानुसार बदलता रहता है। कुछ लोग कला को केवल मनोरंजन का ही एक विषय मानते है, परन्तु व्यवहार में ऐसा नहीं है। आदिकाल से ही मानव रेखाचित्रों के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करता रहा है, जिनके आधार पर चित्रकला की परिभाषा निर्धारित की जा सकती है। प्रसिद्ध सहित्यकार व चित्रकार रवीन्द्रनाथ टैगोर के अनुसार, चित्रकला के क्षेत्र में मात्र रंग और रेखाएँ ही कोई सन्देश नहीं देतीं, अपितु उनमें ध्वनि होती है, लय होती है, जिनका अन्तिम उद्देश्य कलाकार की आंतरिक और बाह्य कल्पना का सम्प्रेषण एवं एक सानुपातिक समप्रता का विकास करना होता है।”1 ‘चित्रकला’ के सदंर्भ में कुछ और विचार इस प्रकार हैं :

नन्दलाल बोस के अनुसार, ”कला कल्पना है, वह कलाकार की सौन्दर्यमूलक भावनाओं की अभिव्यक्ति है, जो रेखाओं व रंगों के माध्यम से अभिव्यक्त होती है और जब वह कला दूसरे के अन्दर सौन्दर्यमूलक भावनाओं को प्रेरित करती है तो वह अपने में सम्पूर्णता लाती है।”2 क्रोचे के विचार में, “art is a vision or intuition.”3 माईकल ऐन्जिलो के विचार में  “one paints not with the hands but with the brain.”4  हरबर्ट रीड के भाब्दों में,  “The real function of art is to express feeling and transmit understanding”.5 स्टैला क्रमरीश के शब्दों में “Art speaks its own language.  It does not consist of words and its contents are not ideas but forms and colours which assume the shape of an inner experience.  The language of art therefore is international.”6

चित्रकार अपनी कलाकृतियों के माध्यम से सृजन का सुन्दरतम रूप हमारे समक्ष प्रस्तुत करते हैं। कला समीक्षक अपनी समीक्षा द्वारा हमें विभिन्न चित्रकारों की कलाकृतियों में विशिष्ट गुणों व कमियों के विभिन्न पहलुओं से अवगत करवाते हैं। परन्तु अपनी चित्रकला के माध्यम से अपने जीवनकाल में ही पर्याप्त यश और धन कमाने का अवसर कुछ ही भाग्यशाली चित्रकारों को मिलता है। कुछ ऐसे ही विचार सुप्रसिद्ध चित्रकार अमृता  भोरगिल ने अपने इन भाब्दों में व्यक्त किए, मुझे प्रंशसा नहीं मिली और मैं इसके लिए वाकई तरसती रही हूँ।”7

इसी प्रकार के भाव एम. एल. जौली द्वारा भी अपने दिनांक 6 जनवरी 2014 के ‘ट्रिब्यून’ में प्रकाशित लेख में निम्नलिखित शब्दों में व्यक्त किए :

“Suddenly the name, ‘Gaitonde’ was on everyone’s lips.  The late artist, who had been a recluse throughout his life, had fetched a whopping sum of Rs.23.7 crore at the Christie auction.  It was sort of a resurrection from near oblivion to the status of a demi-god.”8

निम्नलिखित घटना भी, जो कि दिनांक 29 जनवरी 2014 के ‘टाइम्स आफ इन्डिया’ में प्रकाशित हुई, कुछ इसी प्रकार की स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करती है :

“An untitled abstract painting by Vasudeo S. Gaitonde was put on permanent display at Nagpur’s Central Museum from Tuesday.  Neglected for five decades, it was recently restored.  Gaitonde, whose parents were from Goa, spent his childhood in Nagpur before moving to Mumbai and Delhi to pursue art.  An abstract painting by him was bought last month for Rs.23.7 crore at an auction.  Gaitonde who lived in penury, probably sold the painting for Rs.750/- to the museum in the 1950s or early 60s.”9

चित्रकारों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप में अनेक प्रकार से प्रेरणा प्राप्त होती है। चित्रकारों को अपनी कलाकृतियों की प्रंशसा पाना तो उनको प्रेरणा प्रदान करता ही है, लेकिन आज के भौतिकवाद के युग में उनकी कलाकृतियों के आर्थिक महत्त्व को भी नकारा नहीं जा सकता। कई बार देखने में आया है कि कई चित्रकार अपने जीवनकाल में अपनी कलाकृतियों के आधार पर यश-प्राप्ति व आर्थिक लाभ, दोनों से ही वंचित रह जाते है। इसका एक जीवन्त उदाहरण सुप्रसिद्व डच चित्रकार Vincent Van Gogh का है, जिन्हें अपने जीवनकाल में कोई प्रसिद्धि नहीं मिली। यहां तक कि वे एक चित्रकार के रूप में अपने जीवन निर्वाह के लिए सदैव संघर्ष करते रहे तथा अपने जीवनकाल में वे अपनी केवल एक ‘The Red Vineyard’ नामक कलाकृति ही बेच पाए; जिसे उन्होंने अपनी मृत्यु से केवल कुछ माह पूर्व Brussel में 400 फैंक्स में बेचा। उनके मरणोपरांत उनकी बहुत सी कलाकृतियां विक्रताओं की अपेक्षा से अधिक मूल्य पर बिकीं, जैसे ‘Six Sunflowers’ नामक कलाकृति $ 39.9 मिलियन में, ‘Irises’ नामक कलाकृति  $53.9  मिलियन में तथा ‘Portrait of Piachet’ नामक कलाकृति $82.5  मिलियन में बेची गई।10

प्राय: देखा गया है कि भारतीय चित्रकारों की कलाकृतियां, कला की दृष्टि से उगाकोटि की होते हुए भी, स्थानीय स्तर पर उचित मूल्य नहीं दे पातीं, जबकि आम लोगों की धारणा है कि किसी चित्रकार को उसकी कलाकृति का ऊँचा आर्थिक मूल्य उसको अधिक प्रसिद्वि व मान्यता प्रदान करता है।

यद्यपि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, इण्लैण्ड जैसे पश्चिमी देशों में Sotheby, Christie, Bonhams जैसे बडे-बडे Auction Houses उपलब्ध हैं, जिनके बहुत बडे नेटवर्क हैं तथा अन्य पुरातत्त्व-महत्त्व की वस्तुओं व विभिन्न प्राचीन व आधुनिक कलाकारों की कलाकृतियों के साथ-साथ देश विदेश के चित्रकारों की कलाकृतियों को भी, उनकी कला का मूल्यांकन कर अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में उचित मूल्य पर नीलामी के माध्यम से बेचा जाता है। मई 2010 की Christie की निलामी में अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति-प्राप्त चित्रकार पब्लो पिकासो को 1932 में निर्मित एक ‘Nude, Green Leaves and Bust’ नामक कलाकृति को, जिसे पिछले 50 वर्षों में किसी प्रदर्शनी में नहीं देखा गया था, को $0,64,82,500 में बेचा गया था जो कि अपने आप में एक कीर्तिमान था।11 इसी प्रकार जार्ज ब्रेक की एक ‘La Treille’ नामक कलाकृति को उसकी बिक्री के  पूर्व अनुमान से दुगने मूल्य पर $ 1,01,62,500 में बेचा गया।12 इसी श्रृंखला में पिकासो की एक और ‘Boy with Pipe’ नामक कलाकृति न्यूयार्क (अमेरिका) Sotheby’s Auction House के माध्यम से $ 10,41,68,000 में बेची गई।

न्यूयार्क, अमेरिका में Sotheby को नवम्बर 2013 में हुई नीलामी में Andy Warhol की 1963 में चित्रित की 8’x13′ की एक ‘Silver Car Crash (Double Disaster)’ नामक कलाकृति $105 मिलियन में बिकी। उसी नीलामी मे उनकी एक और ‘Liz # 1 (Early Coloured Liz)’ नामक कलाकृति, जिसमें Portrait of Elizabeth Taylor चित्रित किया गया था, को $ 20 मिलियन में बेचा गया। उसी नीलामी में  Willem de Kooning  की  ‘Untitled V’ नामक कलाकृति को, जिसे 1980  से किसी भी प्रदर्शनी में देखा नहीं गया था, $ 24.8  मिलियन में बेचा गया।13 न्यूयार्क (अमेरिका) में SOTHEBY की मई 2013 की एक नीलामी में 81 वर्षीय जर्मन चित्रकार Gerhard Richter की 1968 में चित्रित की गई एक ‘DOMPLATZ, MAILAND (CATHEDRAL SQUARE MILAN)’ नामक कलाकृति $ 3,71,25,000 में बेची गई, जो मूल्य किसी भी जीवित चित्रकार की कलाकृति का अधिकतम मूल्य था। इसी नीलामी में Barnett Newman की एक ‘One-ment VI’ नामक कलाकृति  $ 4,38,45,000 के एक कीर्तिमान मूल्य पर बेची गई जो कि उसकी  $ 40 मिलियन के पूर्व बिक्री के अनुमानित मूल्य से भी अधिक था।14

इस सदंर्भ में यह बताना अनुचित नहीं होगा कि बहुत से भारतीय चित्रकारों की कलाकृतियों को भी पिछले कई वर्षों से SOTHEBY, Christie, Bonhams जैसे अन्तर्राष्ट्रीय Auction Houses के माध्यम से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के उचित मूल्य पर बिकने का सौभाग्य प्राप्त होता रहा है, जिनमें से कुछ भारतीय चित्रकारों  का, जिनकी  कलाकृतियां ऐसे अन्तर्राष्ट्रीय Auction Houses के माध्यम से बिक्री; वर्णन यहां किया गया है :

सुप्रसिद्व भारतीय चित्रकार एम. एफ. हुसैन, जो कभी फिल्म उद्योग की फिल्मों के पोस्टर बनाने से अपनी आजीविका कमाते थे, द्वारा अपनी 1971 में निर्मित ‘Battle of Ganga and Jamuna: Mahabharta 12’ को 2008 में Christie’s International, London के माध्यम से $1.6 मिलियन में बेचा गया जो कि एस. एच. रजा की ‘सैाराष्ट्र’ नामक कलाकृति, जो 2010 में $3.4 मिलियन (16.51 करोड़ रु.) में बिक्री, के मूल्य के समीप ही था।15 हुसैन की ‘Sita with Golden Deer’ नामक कलाकृति £ 1,08,000 में, उनकी मृत्यु के केवल 12 घण्टे पश्चात्, बिकी।  उनकी सफदर हाश्मी को श्रद्वांजलि के रूप में बनाई गई कलाकृति 2008 में  $ 1 मिलियन  में  बिकी।

न्यूयार्क के SOTHEBY AUCTION HOUSE के माध्यम से प्रसिद्व चित्रकार शोभासिंह द्वारा सिक्ख शासक महाराजा रंजीत सिंह का एक तैलचित्र 1.04 करोड रुपए में बिका।16 दिनांक, 25 मार्च 2011 को SOTHEBY AUCTION HOUSE के माध्यम से न्यूयार्क (USA) में 82 वर्षीय अकबर पदमसी की 1960 में चित्रित Black and White नग्न कलाकृति $ 1,42,600/- (6.3 करोड़ रुपए) में बेची गई।17 उसी श्रृंखला में तैय्यब मेहता की ‘BULLS’ (2007 मे) व एम. एफ. हुसैन की ‘FIVE SENSES’ ‘8 HORSES’ (2010) नामक कलाकृतियां क्रमश: 12.44 करोड़ रुपए, 11.69 करोड़ रुपए व $ 4,42,750 में बिकीं। मई 2013 में New York के SOTHEBY AUCTION HOUSE ने एशियन चित्रकारों की कलाकृतियों की बिक्री के लिए एक आयोजन किया जिसमें गायेतोण्डे के बिना भीर्षक तैलचित्र को $ 9,65,000 में; सैय्यद हैदर रजा की ‘Rajasthan I’ नामक कलाकृति  $ 8,09,000 में; मनजीत बावा की ‘The Black Devi’ नामक  कलाकृति $ 3,89,000 में; भूपेन खक्खर की ‘Satsang’ (1988) नामक कलाकृति $ 3,41,000 में; के. जी. सुब्रमणियम की ‘Mask, Icon, Mount, Mascot’ नामक कलाकृति  $ 1,85,000 में और बहुत से एशिया महाद्वीप के देशों के कलाकारों की कलाकृतियों का विक्रय हुआ। 18 Christie की न्यूयार्क में आयोजित एक बिक्री में एम. एफ. हुसैन की 13 कलाकृतियां $ 4.2 मिलियन (Rs.10 crore) में बेची गई।19

Christie ने भी New York में वरिष्ठ एशियन चित्रकारों की कलाकृतियों की बिक्री के लिए सितम्बर 2013 में न्यूयार्क में आयोजन किया, जिसमें रवीन्द्रनाथ टैगोर, नन्दलाल बोस, अबनीन्द्रनाथ टैगोर व अन्य चित्रकारों की कलाकृतियों $ 7,16,09,313 (रु. 43 करोड) के मूल्य में की बेची गई, जिसमें अबनीन्द्रनाथ टैगोर की ‘SHIVA SIMANTINI’  नामक अकेली कलाकृति का $ 5,55,750 (3.34 करोड रु.)  में विक्रय हुआ।20

उपर्युक्त विश्लेषण से स्पष्ट है कि भारतीय चित्रकारों की कलाकृतियां बहुत ही उच्च कोटि की हैं, जो कि किसी भी प्रकार से दूसरे अन्तर्राष्ट्रीय चित्रकारों की कलाकृतियों से स्पर्धा में कम नहीं हैं तथा उनकी अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में बहुत मांग है। केन्द्र व राज्य-सरकारों के साथ-साथ दूसरी सरकारी व गैर-सरकारी संस्थाओं को भी अपने चित्रकारों, विशेषकर उभरते चित्रकारों को, देश के अन्दर व विदेशों में होने वाली Art Exhbitions, Art Summits व प्रसिद्व नीलामी-गृहों द्वारा आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय नीलामी में भाग लेने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन देना चाहिए, ताकि वे बिना संकोच उनमें भाग ले सकें। Christie, London की भारत में 19 दिसम्बर 2013 की नीलामी की सफलता के पश्चात, न-केवल Christie अपितु दूसरे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के Auction Houses, जिनमें Sotheby व Bonhams मुख्य हैं, भी भारत में विभिन्न चित्रकारों की कलाकृतियों की नीलामी आयोजित करने के लिए आगे आएँगे। इससे भारतीय चित्रकारों की कलाकृतियों का महत्त्व और भी अधिक बढ़ जाएगा तथा इससे प्रोत्साहन के साथ-साथ उन्हे प्रेरणा भी मिलेगी।

संदर्भ सूची

  1. रवीन्द्रनाथ टैगोर QUOTED IN डा. प्रेमचन्द्र गोस्वामी द्वारा प्रकाशित ‘आधुनिक भारतीय चित्रकला के आधार स्तम्भ,’ राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, जयपुर, पृष्ठ 38।
  2. नन्दलाल बोस, QUOTED IN डा. किरण प्रदीप द्वारा प्रकाशित ‘भारतीय आधुनिक कला (आकृति-3)’ राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, जयपुर, पृष्ठ 1.39।
  3. क्रोचे QUOTED IN डा. किरण प्रदीप द्वारा प्रकाशित ‘भारतीय आधुनिक कला (आकृति-3) राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, जयपुर, पृष्ठ 1.83।
  4. माईकल एन्जिलो QUOTED IN डा. किरण प्रदीप द्वारा प्रकाशित ‘भारतीय आधुनिक कला (आकृति-3)’ राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, जयपुर, पृष्ठ 1.84।
  5. हरबर्ट रीड QUOTED IN डा. किरण प्रदीप द्वारा प्रकाशित ‘भारतीय आधुनिक कला (आकृति-3)’ राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, जयपुर, पृष्ठ 1.84।
  6. स्टैला क्रमरशि QUOTED IN डा. किरण प्रदीप द्वारा प्रकाशित ‘भारतीय आधुनिक कला (आकृति-3)’ राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, जयपुर, पृष्ठ 1.70।
  7. अमृता भोरगिल QUOTED IN डा. किरण प्रदीप द्वारा प्रकाशित ‘भारतीय आधुनिक कला (आकृति-3)’ राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, जयपुर, पृष्ठ 1.47।
  8. दि ट्रिब्युन, 6 जनवरी 2014
  9. टाईम्ज़ आफ इन्डिया, 29 जनवरी 2014
  10. दि ट्रिब्युन, 19 अगस्त 2012
  11. टाईम्ज आफ इन्डिया, 6 मई 2010/9 मार्च 2011
  12. टाईम्ज़ आफ इन्डिया, 6 मई 2010
  13. टाईम्ज़ आफ इन्डिया, 15 नवम्बर 2013
  14. टाईम्ज़ आफ इन्डिया, 16 मई 2013
  15. टाईम्ज़ आफ इन्डिया, 14 नवम्बर 2013
  16. टाईम्ज़ आफ इन्डिया, 17 मई 2013
  17. दि ट्रिब्युन, 26 जून 2011
  18. दि ट्रिब्युन, 4 अप्रेल 2011
  19. टाईम्ज़ आफ इन्डिया, 27 मार्च 2011
  20. दि ट्रिब्युन, 21 मार्च 2013
  21. टाईम्ज़ आफ इन्डिया, 16 सितम्बर 2011
  22. दि ट्रिब्युन, 12 अक्तुबर 2013

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