छत्तीसगढ़ संवाद की कार्यप्रणाली का विश्लेषणात्मक अध्ययन

आशुतोष मंडावी*
डॉ. गोपा बागची**

1. भूमिका

छ.ग. राज्य की विकासात्मक योजना के प्रचार-प्रसार और जन-जन तक उनकी ही बोली करने के उद्देष्य से शासकीय मुद्रणालय के होते हुए भी जनसम्पर्क विभाग के कार्यों के सहयोग और त्वरित गति प्रदान करने की मानसा से राज्य शासन की ओर छ.ग. संवाद का गठन वर्ष 2001 में फर्म्स एंड सोसाइटिज एक्ट 1973 के तहत किया गया और 19 अप्रैल 2001 से समिति के रूप में छत्तीसगढ़ संवाद ने कार्य करना प्रारंभ किया हैं।

छत्तीसगढ़ संवाद के गठन के पूर्व विज्ञापनों का समाचार में प्रकाषित करवाने का कार्य जनसम्पर्क विभाग के माध्यम से ही हुआ करता था, लेकिन अब जनसम्पर्क विभाग के सभी विज्ञापनों का प्रकाशन व प्रचार-प्रसार का कार्य छ.ग. संवाद के माध्यम सम्पन्न हो रहा है। इसके एवज में छ.ग. संवाद जारी विज्ञापनों से 10 प्रतिशत सेवा शुल्क लेती हैं। सेवा शुल्क का उपयोग छत्तीसगढ़ संवाद कर्मचारियों के वेतन भुगतान व अन्य कार्यों के मैनटेंस में करती हैं। इस प्रकार छ.ग. संवाद एक स्व-वित्तपोषित संस्था के रूप में कार्य कर रही हैं।

शासकीय मुद्रणालय के दौर में सभी प्रकाशन व प्रचार-प्रसार कार्यों के लिए शासन के सभी विभागों की ओर टेंडर जारी किया जाता था। यही वजह थी कि सेवा शुल्क में एकरूपता के साथ-साथ गुणवत्ता की भी कमी नजऱ आने लगी। उदाहरण के तौर पर जिस कार्य को एक विभाग 100 रूपए में संपन्न कराता था। उसकी कार्य को दूसरा विभाग 200 रूपए में संपन्न कराता था। इन्ही अंतरों को एकरूपता प्रदान करने के उद्देष्य से छत्तीसगढ़ शासन ने 2001 में जनसम्पर्क विभाग की सहयोगी संस्था के रूप में छ.ग. संवाद का गठन किया हैं। चूंकि छत्तीसगढ़ संवाद के पास राज्य शासन के सभी 52 विभागों का कार्य होता हैं। इसीलिए छत्तीसगढ़ संवाद ने चार शाखाओं को रूप में कार्यों का विभाजन कर लिया हैं।

प्रकाशन शाखा:-

संवाद के प्रकाशन शाखा में राज्यशासन के सभी विभागों के विज्ञापनों, ब्रोसर, पेम्पलेट, कैलेण्डर, प्रतिवेदन, होडिंग्स और बुक की कापीराइटिंग व पु्रफ राइटिंग करने का कार्य सम्पादित किया जाता है। शाखा द्वारा तैयार डिजाइन को विज्ञापन शाखा को सौंप दिया जाता हैं।

विज्ञापन शाखा:-

जहां से प्रकाशन शाखा का कार्य समाप्त होता हैं। वहीं से विज्ञापन शाखा का कार्य प्रारंभ होता है। तैयार विज्ञापनों की गुणवत्ता की पुष्टि के बाद विज्ञापन शाखा की ओर तैयार डिजाइन को संबंधित विभाग को सौंप दिया जाता हैं। और उनके आदेश पर ही प्रचार-प्रसार के समाचार पत्रों, मैग्जीन व न्यूज़ चैनलों को जारी किया जाता हैं।

वित्तीय शाखा:-

छत्तीसगढ़ संवाद के वित्तीय शाखा का प्रचार-प्रसार और प्रकाशन कार्यों से हांलाकि कोई संबंध नहीं हैं। लेकिन वित्तीय शाखा को संवाद का सबसे महत्वपूर्ण शाखा माना जाता हैं। क्योंकि यही वह शाखा है जहां छत्तीसगढ़ संवाद के लेन-देन व लाभ-हानि का लेखा-जोखा रखा जाता हैं।

इलेक्ट्रानिक मीडिया शाखा:-

इलेक्ट्रानिंक मीडिया शाखा का भी कार्य लगभग प्रकाशन शखा के समान ही होता है। इन दिनों शाखाओं का अंतर मात्र इतना ही है कि प्रकाषन शाखा में प्रिंट माध्यमों के लिए का सम्पादित किया जाता है। जबकि इलेक्ट्रानिक मीडिया शाखा के दृष्य व श्रव्य माध्यम के लिए किया जाता है। इस शाखा में राज्य शासन के द्वारा संचालित योजना के प्रचार-प्रसार के लिए दर्जनों शॉट मुवी व डक्युमेंट्री तैयार की गई हैं। जिनमें तरक्की का सफर, छत्तीसगढ़ के खरट प्रमुख हैं। जिनका प्रसारएण न्यूज़ चैनलों के साथ-साथ एम.एम. रेडियों और आकाशवाणी में किया जाता रहा हैं।

इनके अलावा छ.ग. संवाद भी अन्य राज्यों की भांति प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को राज्य शासन के सभी विभागों में रिक्त पदों और उनकी भर्ती नियमों से परिचित कराने के लिए एक मैग्जीन का भी प्रकाशन करता हैं। छत्तीसगढ़ संवाद के इस साप्ताहिक मैग्जीन का प्रकाशन रोजगार और नियोजन के नाम से होता हैं। रोजगार और नियोजन नामक मैग्जीन में राज्य सरकार के सभी विभागों के रिक्त पद भर्ती विज्ञापनों का प्रकाशन किया जाता हैं। शासकीय विज्ञापनों के साथ-साथ इस मैग्जीन में निजी संस्थाओं का भी विज्ञापन प्रकाशित किया जाता हैं। इस मैग्जीन का प्रचार-प्रसार न छत्तीसगढ़ राज्य के सभी जिलों में हो रहा हैं। बल्कि छत्तीसगढ़ राज्य के अलावा रोजगार और नियोजन का प्रचार-प्रसार मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश में भी हो रहा हैं।

छत्तीसगढ़ संवाद की कार्यप्रणाली सिर्फ संवाद के मुख्यालय तक सीमित नहीं हैं। बल्कि उपरोक्त में प्रस्तुत समस्त क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ संवाद जनसम्पर्क स्थापित करने शासन की योजनाओं को ग्रामीण, शहरी और दुरस्त आंचलों में निवासरत विभिन्न जनजातीय के लोगों को उन्ही की भाषा और बोली में जागरूक करने तथा शासन की योजनाओं से अवगत कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं।

छत्तीसगढ़ संवाद शासन के सभी विभागों के डिजाइनिंग, प्रकाशन, प्रचार-प्रसार का कार्य तो करती ही हैं। साथ ही राज्य के सभी जिलों और जिलों में निवासरत अनुसूची जाती-जनजाती सामुदाय के लोगों को उनकी सुविधा के अनुरूप संप्रेषित करने का भी कार्य करती हैं।

क्र. 1 अध्ययन का उद्देष्य

शोध में अध्ययन के उद्देश्य से तात्पर्य उन महत्वपूर्ण तथ्यों से है जिसमें लघुशोध की समस्या का समाधान निहित होता है। जिसके द्वारा प्रचार-प्रसार का विस्तार छत्तीसगढ़ संवाद की माध्यम से बिना किसी बाधा के व्यवस्थित व सूचारू रूप से संभव हो सकें।

छत्तीसगढ़ संवाद की चारों शाखाएं अपनी जिम्मेदारी का बखूबी निर्वहन कर रही है। जिसका नतीजा है कि वर्ष 2014 में प्रदेश को एक माह के अंदर ही छह राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया है। वर्तमान में प्रदेश, देश के सभी राज्यों में नम्बर-1 राज्य है।

राज्य के प्रत्येक जनता की आवश्यकताएं एक-दूसरे से भिन्न-भिन्न होती है। राज्य सरकार की उनकी आवश्यकताओं के आधार पर योजनाओं की रूपरेखा तैयार करती है लेकिन आम जनता तक उनके प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी केवल जनसम्पर्क की सहयोगी संस्था छत्तीसगढ़ संवाद ही होती हैं।

प्रस्तुत शोध में प्रचार-प्रसार की दिषा में छत्तीसगढ़ संवाद की कार्यप्रणाली का विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया है ताकि शासकीय व निजी संस्था के साथ-साथ प्रदेश की जनता भी छत्तीसगढ़ संवाद के महत्व को समझ सकें।

परिकल्पना (अध्ययन संबंधित परिकल्पनाएं):-

परिकल्पना क्रमांक-           H1:-      छत्तीसगढ़ संवाद प्रचार-प्रसार का कार्य करती हैं।
परिकल्पना क्रमांक-           H2:-      मुख्यमंत्री खाद्यान योजना से प्रदेष की जनता लाभान्वित हुई हैं।
परिकल्पना क्रमांक-           H3:-      छत्तीसगढ़ संवाद के माध्यम से योजनाओं का उचित प्रचार-प्रसार होता हैं।
परिकल्पना क्रमांक-           H4:-      छत्तीसगढ़ राज्य नम्बर-1 है इसमें छत्तीसगढ़ संवाद की महत्वपूर्ण भूमिका निहित हैं।
परिकल्पना क्रमांक-           H5:-      धार्मिक सद्भावना और समरसता का केन्द्र है त्रिवेणी संगम राजिम।

क्र.2 परिकल्पनाओं की पुष्टि

परिकल्पना क्रमांक:- H1

उक्त परिकल्पना के आधार पर छत्तीसगढ़ संवाद के अधिकारियों, कर्मचारियों, तकनीकी विभाग के कर्मचारियों से कार्यों एवं उनकी समस्याओं की जानकारी हेतु साक्षात्कार अनुसूची से प्राप्त उत्तरों का प्रतिशत निकाला गया है। जो निम्न सारणी में प्रस्तुत हैं –

सारणी क्रमांक-1

क्र.कथनहाँ की संख्या
प्रतिशत में
नहीं की संख्या
प्रतिशत में
कुल
1.क्या आप लोग नियमित रूप से
प्रचार-प्रसार करते हैं?
1000100
2.क्या छत्तीसगढ़ संवाद में सभी प्रशिक्षित
अधिकारी व कर्मचारी कार्यरत हैं?
8020100
3.क्या आप लोगों के द्वारा प्रचार-प्रसार
के लिए नई तकनीकों का प्रयोग
किया जाता हैं?
1000100
4.क्या छत्तीसगढ़ संवाद में प्रचार-प्रसार
के लिए अत्याधुनिक मशीनों का
प्रयोग किया जाता हैं?
1000100
5.क्या आप सभी छत्तीसगढ़ संवाद के
कार्यों से संतुष्ट हैं?
7030100

आरेख क्रमांक-1

उक्त सारिणी से स्पष्ट हैं कि छत्तीसगढ़ संवाद में नियमित रूप से 100 प्रतिशत प्रचार-प्रसार का कार्य होता हैं। छत्तीसगढ़ संवाद में कार्यरत अधिकारी व कर्मचारी, डिजाइनिंग व प्रचार-प्रसार के कार्य में 80 प्रतिशत प्रशिक्षित हैं। 20 प्रतिशत ही ऐसे है जो नियमित कर्मचारी नहीं है इसलिए वे अप्रशिक्षित हैं। छत्तीसगढ़ संवाद के द्वारा शहरी, ग्रामीण व दूरस्थ अंचलों में प्रचार-प्रसार के लिए लक्षित समूह के अनुरूप 100 प्रतिशत नई तकनीकों का प्रयोग किया जाता हैं। समय की बचत और समय सीमा के अंदर कार्य पूर्ण करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ संवाद 100 प्रतिषत अत्याधुनिक मशीनों का प्रयोग करती हैं। छत्तीसगढ़ संवाद में कार्यरत सभी कर्मचारी व अधिकारी संस्था की कार्यप्रणाली से 70 प्रतिशत संतुष्ट हैं। लेकिन 30 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अभी और भी सुधार की आवश्यकता हैं।

परिकल्पना क्रमांक H2

‘मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना से प्रदेश की जनता लाभान्वित हुई हैं।’

उक्त परिकल्पना के आधार पर ग्रामीण, शहरी व शिक्षित वर्ग के लोगों से योजना के प्रचार-प्रसार और प्रदेश की जनता को इससे हुए लाभ या हानि के संबंध में जानकारी हेतु साक्षात्कार अनुसूची से प्राप्त उत्तरों का प्रतिशत निकाला गया है जो निम्न सारिणी से प्रस्तुत हैं:-

सारिणी क्रमांक- 2

 क्र.कथनहाँ की संख्या
प्रतिशत में
नहीं की संख्या
प्रतिशत में
कुल
1.मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना को राष्ट्रीय
पुरस्कार मिला हैं। क्या आप गौरान्वित
महसूस करते हैं?
1000100
2.क्या प्रदेश की जनता को इससे
फायदा हुआ हैं?
1000100
3.क्या आप इस योजना के पक्ष में हैं? 8020100
4.क्या प्रदेश में भूखमरी का अंत हुआ हैं?9010100
5.क्या इससे प्रदेशवासियों को विकास
की नई दिशा मिली हैं?
7525100

आरेख क्रमांक- 2

उक्त सारिणी से स्पष्ट हैं कि छत्तीसगढ़ संवाद के प्रचार-प्रसार का ही प्रतिफल है कि मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना को 2014 में राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। सारिणी से स्पष्ट हैं कि प्रदेश की जनता भी योजना के लिए मिले राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए स्वयं को गौरान्वित महसूस कर रहे हैं। साथ ही प्रदेश की जनता को मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना का 100 प्रतिशत लाभ मिला हैं। जिसका नतीजा है कि आज प्रदेशवासियों को रोटी की चिंता नहीं सताती हैं। उन्हे पता है कि राज्य सरकार ने उनके लिए ऐसी योजना बनाई है, जिसके तहत उन्हे महीने भर का राशन उनके ही बजट उपलब्ध हैं। 80 प्रतिशत जनता इस योजना के पक्ष में है लेकिन 20 प्रतिशत युवा व शिक्षित वर्ग का मानना है कि इस योजना के आ जाने से लोग मेहनत मजदूरी को छोडक़र आराम-तलक हो गए हैं। लेकिन आज भी 10 प्रतिशत लोगों की पहुंच से यह योजना दूर हैं। 85 प्रतिशत जनता का मानना है कि इस योजना के आ जाने से प्रदेशवासियों को विकास की दिशा मिली हैं। लेकिन 15 प्रतिशत लोगों का मानना है कि नेक उद्देश्य से बनाई गई इस योजना का लोगों ने गलत अर्थ निकाला है और विकास की मुख्य धारा से जोडऩे के बजाय विकास की राह से भटक गए हैं।

परिकल्पना क्रमांक H3

‘छत्तीसगढ़ संवाद के माध्यम से योजनाओं का उचित प्रचार-प्रसार होता हैं।’

उपरोक्त परिकल्पनाओं के आधार पर शिक्षित वर्ग, अशिक्षित वर्ग, झुग्गी बस्ती निवासी युवा, कृषक और समाचार पत्रों के विज्ञापन विभाग से जुड़े लोगों से छत्तीसगढ़ संवाद के द्वारा योजनाओं के प्रचार-प्रसार के विषय जानकारी हेतु साक्षात्कार अनुसूची से प्राप्त उत्तरों का प्रतिशत निकाला गया हैं। जो निम्न सारिणी में प्रस्तुत हैं:-

सारिणी क्रमांक-3

 क्र.कथनहाँ की संख्या
प्रतिशत में
नहीं की संख्या
प्रतिशत में
कुल
1.क्या छत्तीसगढ़ संवाद के माध्यम से
योजनाओं का उचित प्रचार-प्रसार
होता हैं?
7030100
2.क्या जनता योजनाओं के प्रति
जागरूक हो पाती हैं?
7525100
3.क्या छत्तीसगढ़ संवाद की पहुंच शहरी
व ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ दूरस्त
अंचलों में भी हैं?
9010100
4.क्या योजनाओं के प्रचार-प्रसार के
लिए छत्तीसगढ़ संवाद द्वारा जारी
विज्ञापन, सहायक सिद्ध होते हैं?
8020100
5.क्या लक्षित समूह के आधार पर
विज्ञापन तैयार किया जाता हैं?
9505100

आरेख क्रमांक-3

उक्त सारिणी से स्पष्ट हैं कि छत्तीसगढ़ संवाद के द्वारा शासन की योजनाओं का उचित तरीके से प्रचार-प्रसार किया जाता हैं। लेकिन आज भी प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में संवाद के द्वारा कुछ कमी हैं ।

जिसके कारण 70 प्रतिशत ही प्रचार-प्रसार का काम उचित तरीके से हो पाता है। 30 प्रतिशत लोग आज भी वंचित रह जाते हैं। जनता को योजनाओं के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से किए गए प्रयासों में छत्तीसगढ़ संवाद को 75 प्रतिशत सफलता मिली हैं। लेकिन 25 प्रतिशत लोग आज भी उनकी पहुंच से दूर है। प्रचार-प्रसार के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ संवाद को लेकर जनता का मानना है कि प्रदेश के 90 प्रतिशत क्षेत्रों में संवाद की पहुंच हैं। 10 प्रतिशत क्षेत्र व क्षेत्रवासी अभी भी उनकी पहुंच से दूर हैं। विज्ञापन के क्षेत्र से जुड़े लोगों का मानना है कि छत्तीसगढ़ संवाद द्वारा जारी विज्ञापन 80 प्रतिशत सहायक सिद्ध हो रहे है। लेकिन किन्ही तकनीकी खामियों के कारण ये 80 प्रतिशत अब तक 100 प्रतिशत तब्दील नहीं हो पाया हैं। छत्तीसगढ़ संवाद के द्वारा तैयार विज्ञापन पूर्णत: लक्षित समूह के आधार पर ही होते हैं। लेकिन 95 प्रतिशत लोग ही इससे लाभान्वित हो पाते हैं। 5 प्रतिशत लोग इससे परिचित तो होते है लेकिन योजनाओं के लाभ को प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं।

परिकल्पना क्रमांक H4

‘छत्तीसगढ़ राज्य देश के सभी राज्यों में नम्बर-1 हैं। इसमें छत्तीसगढ़ संवाद की महत्वपूर्ण भूमिका निहित हैं।’

उक्त परिकल्पना के आधार पर विभिन्न विभाग के शासकीय कर्मचारियों से संबंधित विषय में जानकारी हेतु साक्षात्कार अनुसूची से प्राप्त उत्तरों का प्रतिशत निकाला गया है जो निम्न सारिणी से प्रस्तुत हैं:-

सारणी क्रमांक-4

क्र.कथनहाँ की संख्या
प्रतिशत में
नहीं की संख्या
प्रतिशत में
कुल
1.देश के सभी राज्यों में छत्तीसगढ़ राज्य
नम्बर-1 हैं। क्या इसमें छत्तीसगढ़ संवाद की
महत्वपूर्ण भूमिका रही हैं?
8020100
2.छत्तीसगढ़ राज्य नम्बर-1 बन पाया हैं। क्या
इसका पूरा श्रेय छत्तीसगढ़ संवाद को जाता हैं?
7525100
3.छत्तीसगढ़ राज्य अपनी प्रभावशाली योजनाओं
के कारण नम्बर-1 हैं। क्या इन योजनाओं
को जन-जन तक पहुंचाने में छत्तीसगढ़ संवाद
की ही भूमिका अहम रही हैं?
9010100
4.क्या छत्तीसगढ़ संवाद के प्रचार-प्रसार के
बिना राज्य नम्बर-1 नहीं हो सकता था?
6535100
5.क्या छत्तीसगढ़ संवाद के माध्यम से ही योजनाओं
का लाभ जनता को मिला है जिसके कारण
आज छत्तीसगढ़ राज्य नम्बर-1 हैं?
1000100

आरेख क्रमांक-4

उक्त सारिणी से स्पष्ट हैं कि छत्तीसगढ़ राज्य देश के सभी राज्यों में नम्बर-1 राज्य हैं। क्योंकि शासन द्वारा संचालित योजनाएं राज्य की जनता के लिए वरदान साबित हुई हैं शासन की योजनाओं के कारण प्रदेश की जनता को रोजी-रोटी, शिक्षा और स्वास्थ्य इन मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिला हैं। इन मूलभूत सुविधाओं को जनता तक पहुंचाने में छत्तीसगढ़ संवाद ने एक मजबूत कड़ी भूमिका निभाई हैं। 80 प्रतिशत लोगों का मानना हैं कि छत्तीसगढ़ संवाद के प्रचार-प्रसार का नतीजा हैं कि राज्य नम्बर-1 हैं लेकिन 20 प्रतिशत लोगों का यह भी मानना हैं कि यह जनता की जागरूकता का प्रतिफल हैं। 75 प्रतिशत लोगों का मानना है कि इसका श्रेय छत्तीसगढ़ संवाद को दिया जाता है लेकिन 25 प्रतिशत लोग इस बात से सहमत नहीं हैं। 65 प्रतिशत लोगों का मानना हैं कि बिना प्रचार-प्रसार के जनता तक योजनाओं की जानकारी ही नहीं पहुंचती तो राज्य का नम्बर-1 हो पाना तो बहुत दूर की बात हैं। लेकिन 35 प्रतिशत लोग इस बात से असहमत हैं। वर्तमान परिदृष्य में शासन द्वारा बनाई गई योजनाओं का लाभ जनता को मिल पा रहा हैं। इस पर 100 प्रतिशत लोग सहमति जताते हैं कि छत्तीसगढ़ संवाद समय-समय पर योजनाओं का उचित प्रचार-प्रसार करती हैं।

परिकल्पना क्रमांक H5

‘छत्तीसगढ़ संवाद के अथक प्रचार-प्रसार ने पांचवे कुंभ के रूप में स्थापित किया त्रिवेणी संगम राजिम को।’

उक्त परिकल्पना के आधार पर छत्तीसगढ़ संवाद के अधिकारियों के अलावा पर्यटन विभाग की अधिकारी, युवा व टूरिस्ट से संबंधित विषय में जानकारी हेतु साक्षात्कार अनुसूची से प्राप्त उत्तरों का प्रतिशत निकाला गया जो निम्न सारिणी से प्रस्तुत हैं:-

सारिणी क्रमांक-5

क्र.कथनहाँ की संख्या
प्रतिशत में
नहीं की संख्या
प्रतिशत में
कुल
1.क्या पर्यटन को बढ़ावा छत्तीसगढ़ संवाद के प्रयासों से
मिला हैं?
1000100
2.क्या छत्तीसगढ़ संवाद के प्रयासों का नतीजा हैं कि
आज प्रदेश में राजिम को प्रयाग की संज्ञा दी गई हैं?
1000100
3.क्या त्रिवेणी संगम होने के कारण राजिम धार्मिक
सद्भावना और सामाजिक समरसता का केन्द्र बन गया हैं?
9010100
4.छत्तीसगढ़ संवाद के प्रयासों का ही नतीजा हैं कि राजिम
कुंभ के दौरान प्रदेष में देश भर से साधु-संतों का आगमन
और हजारों की तादाद में पर्यटकों का आगमन होता हैं?
1000100
5.क्या प्रारंभ से ही राजिम को प्रयाग की संज्ञा दिलाने में
छत्तीसगढ़ संवाद की अहम भूमिका रही हैं?
8515100

आरेख क्रमांक-5

उपरोक्त सारिणी से स्पष्ट हैं कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में पर्यटन स्थलों को 100 प्रतिशत छत्तीसगढ़ संवाद के कारण ही बढ़ावा मिला हैं। छत्तीसगढ़ संवाद के ही प्रयत्नों का नतीजा हैं कि आज छत्तीसगढ़ में भी राजिम कुंभ को प्रयाग की संज्ञा से नवाजा गया हैं। सोडूर, पैरी और महानदी के त्रिवेणी संगम होने के कारण राजिम, धार्मिक सद्भावना और समरसता का केन्द्र बना हुआ हैं। राजिम की इस खासियत को जन-जन में पहुंचाने में छत्तीसगढ़ संवाद की भूमिका अहम रही हैं। 100 प्रतिशत लोगों का मानना हैं कि राजिम कुंभ को प्रयाग की संज्ञा मिलने के बाद यहां प्रति वर्ष हजारों तादाद में साधु-संतों के साथ-साथ पर्यटकों का भी आगमन हो रहा हैं। जो कि राज्य की स्थापना के पूर्व अस्तित्व में ही नहीं था। 85 प्रतिशत लोगों का मानना हैं कि राजिम कुंभ को प्रयाग की संज्ञा दिलाने में छत्तीसगढ़ संवाद की महत्वपूर्ण भूमिका निहित हैं। लेकिन 15 प्रतिशत लोगों का यह भी मानना हैं कि जितनी महत्वपूर्ण भूमिका छत्तीसगढ़ संवाद की रही हैं उतनी ही पर्यटक विभाग के अधिकारियों की भी रही हैं।

क्र.6 निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ राज्य में मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, सूचना एवं क्रांति योजना के तहत लैपटाप वितरण, किसानों के हितों में ब्याज मुक्त ऋण, मुफ्त बीज जैसी अनेकानेक योजनाएं संचालित हैं। इन योजनाओं का प्रदेष की जनता को लाभ मिल पाया है जिसका एक मात्र कारण है जनसम्पर्क विभाग की सहयोगी संस्था छत्तीसगढ़ संवाद की कर्मठता। छत्तीसगढ़ संवाद की कर्मठता की ही प्रतिफल है कि आज राज्य छत्तीसगढ़ राज्य देश के सभी राज्यों में नम्बर-1 हैं। छत्तीसगढ़ संवाद के ही प्रचार-प्रसार का नतीजा है कि प्रदेश की जनता उन्नत धान का उत्पादन कर रही है और प्रदेश को दूसरी बार कृषि कर्मठ पुरस्कार से नवाजा गया हैं।

शोध अध्ययन के आधार पर शोध के निम्नलिखित परिणाम प्राप्त हुये हैं:-

  1. छत्तीसगढ़ संवाद जनसम्पर्क विभाग की सहयोगी संस्था के रूप में कार्य करती हैं।
  2. छत्तीसगढ़ संवाद का कार्य शहरी, ग्रामीण और दूरस्त अंचलों में निवासरत आम जनता तक शासन की योजनाओं का प्रचार-प्रसार करना हैं।
  3. छत्तीसगढ़ संवाद ना सिर्फ विज्ञापनों के माध्यम से प्रचार-प्रसार करती है बल्कि इन विज्ञापनों का डिजाइन भी स्वयं ही तैयार करती हैं।
  4. पत्र एवं पत्रिका का प्रकाशन, छत्तीसगढ़ शासन के विभागों और उसके उपक्रमों, जनकल्याणकारी गतिविधियों का प्रचार-प्रसार, शासन के आधीन नियमों, मण्डलों, अर्धशासकीय संस्थाओं के विज्ञापन, डिजाइन कर उन्हे पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित करने की व्यवस्था छत्तीसगढ़ संवाद का ही कार्य हैं।
  5. निगम, मण्डलों आदि वैबसाइट बनाने तथा इलेक्ट्रानिक मीडिया से प्रचार-प्रसार, संस्था द्वारा शासन की विभिन्न विभागों द्वारा संचालित प्रचार कार्यक्रमों के लिए समन्वयन की भूमिका निभाते हुए छत्तीसगढ़ संवाद के द्वारा प्रचार सामग्री तैयार कराई जाती हैं।
  6. छत्तीसगढ़ संवाद का दायित्व वैचारिक, बौद्धिक, वैचारिक आधार देने का और उनके क्रियान्वयन के लिए योजना बनाना हैं।
  7. संस्था द्वारा तैयार किए गए प्रकाशकों, विज्ञापनों के डिजाइनिंग तथा सृजनात्मक कार्यों में गुणवत्ता के साथ-साथ एकरूपता होने के कारण शासकीय प्रचार अभियान को सफलता मिली हैं।
  8. शासन द्वारा जनहित के कार्यक्रमों तथा योजनाओं का जब-जब व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाया गया उन अवसर पर छत्तीसगढ़ संवाद द्वारा तैयार किए गए विज्ञापनों का प्रकाशन करने एवं अन्य प्रचार सामग्रियों के माध्यम से साकारात्मक वातावरण निर्मित करने में सफलता मिली हैं।

क्र.7 सुझाव

प्रस्तुत लघुशोध के अध्ययन से हमें जो निष्कर्ष प्राप्त हुए है उसके अनुसार पर निम्न सुझाव दिए जा सकते हैं:-

  1. छत्तीसगढ़ संवाद के पास वर्तमान में अपनी कोई निजी मशीने नहीं हैं। बल्कि वे टैण्डर के माध्यम से कार्यों को समयावधि के अंदर पूर्ण करते हैं लेकिन यदि उनके पास स्वयं की मषीने हो जाए तो खर्च भी कम पड़ेगा और कार्यों को और गति दी जा सकेगी।
  2. छत्तीसगढ़ संवाद में अधिकारियों तथा कर्मचारियों के कुल 57 नियमित पद राज्य शासन द्वारा स्वीकृत किए गए हैं। लेकिन कुछ कर्मचारियों को छोडक़र सभी कर्मचारी डेलीविसेस में कार्यरत हैं। इससे इनमें असंतोष का माहौल हैं।
  3. छत्तीसगढ़ संवाद में कर्मचारियों की संख्या कम है जिन्हे भर्ती के माध्यम से तत्काल पूर्ति किया जाना चाहिए।
  4. छत्तीसगढ़ संवाद में अत्याधुनिक मशीनों की आवष्यकता हैं क्योंकि संवाद में तैयार डिजाइन और उन्ही डिजाइनों को बाहर से मंगवाकर बनवाने से एकरूपता नजर नहीं आती हैं।
  5. छत्तीसगढ़ संवाद को शासन द्वारा जल्द ही एक भव्य और अत्याधुनिक मशीनों व सुविधाओं से परिपूर्ण भवन का आबंटन करना चाहिए ताकि प्रचार-प्रसार के कार्यों को और तीव्रगति प्रदान की जा सकें।

संदर्भ ग्रंथ सूची

  1. पटैरिया, षिवअनुराग : छत्तीसगढ़ संदर्भ 2013, छत्तीसगढ़ संवाद, रायपुर।
  2. यदु, डॉ.मन्नूलाल : छत्तीसगढ़ की अस्मिता, छत्तीसगढ़ अस्मिता प्रतिष्ठान, कृष्णसखा प्रेस, रायपुर।
  3. दयाल, डॉ.मनोज : मीडिया शोध, हरियाणा साहित्व अकादमी, पंचकूला, 2003, 2006
  4. सोनी, डॉ.सुधीर : संचार शोध प्रविधियां, यूनिवर्सिटी पब्लिकेशन, जयपुर
  5. नियमावली : छत्तीसगढ़ संवाद।
  6. मिश्र, डॉ.राजेन्द्र : अनुसंधान की प्रविधि और प्रक्रिया।
  7. वोहरा, वंदना : सामाजिक सर्वेक्षण एवं शोध।
  8. सिंह, शषिभूषण : शोध प्रविधि।
  9. शुक्ल, डॉ.दयाषंकर : छ.ग. लोक साहित्य का अध्यन।
  10. राजपाल, डॉ.किरन : छ.ग. का भूगोल, वैभव प्रकाशन पुरानी बस्ती।

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