डॉक्टर नरेंद्र भानावत हिंदी, राजस्थानी और जैन साहित्य के प्रकांड विद्वान थे। वे राजस्थान विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे। मात्र 59 वर्ष की उम्र में कैंसर से संघर्ष करते हुए 4 नवंबर 1993 को उनका निधन हो गया। उनका पूरा जीवन संघर्ष की एक अप्रतिम कहानी है। उदयपुर जिले के एक छोटे से गांव कानोड में आपका जन्म हुआ था। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया था। मां डेलूबाई नितांत अनपढ़ थी लेकिन फिर भी उन्होंने इन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने संघर्ष, योग्यता और प्रतिभा के बल पर अपनी विभिन्न परीक्षाओं में सर्वोच्च अंक प्राप्त किए और अंततः राजस्थान विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में लगभग 30 वर्ष तक अपनी सेवाएं दीं। प्रमुख जैन शोध पत्रिका जिनवाणी के भी 30 वर्षों से अधिक समय तक संपादक रहे। उनके संपादन में जैन धर्म दर्शन पर केंद्रित जिनवाणी के अनेक विशेषांक चर्चित हुए।
उनकी लिखी हुई प्रमुख पुस्तकों की सूची
डॉ. नरेंद्र भानावत : जीवन-रेखा
जन्म : 13 सितम्बर, 1934 कानोड़ (उदयपुर)
निधन : 4 नवंबर, 1993 (जयपुर)
शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), पी-एच.डी., साहित्य रत्न, जैन सिद्धान्त प्रभाकर
प्रकाशित साहित्य [मौलिक कृतियां ]
शोध-समीक्षा-निबन्ध
- राजस्थानी वेलि साहित्य ( शोध प्रबन्ध )
- साहित्य के त्रिकोण
- राजस्थानी वीरकाव्य और सूर्यमल्ल मिश्रण
- जीवन की पगडंडियाँ
- जीवन-मूल्य
- मूल्य आधारित शिक्षा
- विचार-वल्लरी
- राजस्थानी साहित्य : कुछ प्रवृत्तियाँ
- हिन्दी साहित्य की प्रमुख कृतियाँ और कृतिकार
- जैन दर्शन : आधुनिक दृष्टि
- जैन दर्शन तथा साहित्य का भारतीय संस्कृति एवं विचारधारा पर प्रभाव
- अनेकान्त दर्शन : आचार और विचार के संदर्भ में
- विचार-वाटिका
काव्य
हिन्दी काव्य
- आदमी मोहर और कुर्सी
- माटी कुंकुम
- जीवन-गीतिका
- ए मेरे मन!
राजस्थानी काव्य
- जामणजाया
- दूहा शतक
- पर्व शतक
- राजस्थानी दूहा-रस
कहानी: कुछ मणियां कुछ पत्थर
एकांकी: विष से अमृत की ओर
प्रमुख संपादित ग्रन्थ
- भगवान महावीर : आधुनिक संदर्भ में
- राजस्थानी गद्य : विकास और प्रकाश
- कर्म सिद्धान्त
- अहिंसा : विचार और व्यवहार
- पट्टावली प्रबन्ध संग्रह
- श्रावक धर्म और समाज
- जैन संस्कृति और राजस्थान
- राजस्थान का जैन साहित्य
- अपरिग्रह : विचार और व्यवहार
- आचार्य हस्ती : व्यक्तित्व और कृतित्व
- आचार्य विनयचन्द ज्ञान भंडार ग्रन्थसूची
- ध्यान : रूप और मीमांसा
अन्य गतिविधियां
- निदेशक, आचार्य विनयचन्द्र ज्ञान भंडार शोध प्रतिष्ठान, जयपुर
- महामंत्री, अखिल भारतीय जैन विद्वत् परिषद, जयपुर
- संपादक ‘ जिनवाणी ‘ ( जयपुर ) एवं ‘ स्वाध्याय शिक्षा ‘, ‘ स्वाध्याय संदेश ‘ के सम्पादक मंडल के सदस्य






























